मोदी के गढ़ गुजरात में भाजपा कितनी मज़बूत?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात की 26 लोकसभा सीटों के लिए 334 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं। सभी सीटों के लिए 30 अप्रैल को मतदान हो रहा है।
प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नज़र गड़ाए बैठे सूबे के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गुजरात के चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। पिछले कुछ दिनों से अपनी जनसभाओं में गुजरात के लोगों से मोदी भावनात्मक अपील कर गुजरात के बेटे को दिल्ली भेजने को कह रहे हैं।
सोमवार को गुजरात में अपनी आख़िरी जनसभा में लाल क़िले जैसे बने स्टेज से नरेंद्र मोदी ने लोगों से उन्हें प्रधानमंत्री बनाकर सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील की। लेकिन क्या गुजरात में लोग सरदार पटेल और मोदी को एक तरह देखते हैं?
चुनावी वादों से रिझाने की कोशिश
एक तरफ़ जहां नरेंद्र मोदी गुजराती अस्मिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस 'राइट टू गुड हेल्थ' और 'राइट टू होम' की बात कर लोगों तक पहुंच रही है।
कांग्रेस ने पिछले 20 साल में गुजरात में कोई बड़ी जीत हासिल नहीं की है लेकिन इस बार पार्टी मानती है कि लोग उसके साथ हैं।
कांग्रेस के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया कहते हैं, "इस बार हम पिछले लोकसभा चुनाव से ज़्यादा सीटें जीतेंगे क्योंकि लोग मोदी और बीजेपी की राजनीति को समझ गए हैं।"
अभी कांग्रेस के पास हैं 9 सीटें
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 15 और कांग्रेस को 11 सीटें मिली थीं। लेकिन जब पिछले साल दो सीटों पर उपचुनाव हुए, तो दोनों सीटों पर कांग्रेस की पराजय हुई। नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस के पास सिर्फ़ नौ सीटें बचीं।
कांग्रेस के नेताओं को उम्मीद है कि इस बार उन्हें कम से कम छह सीटों पर जीत आसानी से मिलेगी जिनमें साबरकांठा, खेडा, आनंद और बारदोली सीट शामिल है।
पोरबंदर सीट पर एनसीपी से समझौते के कारण कांग्रेस गुजरात में 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
कांग्रेस की उम्मीद
आदिवासी बहुल साबरकांठा सीट पर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला का पलड़ा भारी दिख रहा है। वही मोदी से नाराज़ होकर भाजपा से निकले सोमाभाई पटेल सुरेंद्रनगर सीट पर कांग्रेस को जीत दिला सकते हैं।
कांग्रेस के जो उम्मीदवार मज़बूत नज़र आते हैं उनमें पंचमहाल सीट से भाजपा के मौजूदा सांसद प्रभात सिंह चौहान के ख़िलाफ़ खड़े अमूल डेयरी के प्रमुख रामसिंह परमार और दाहोद सीट पर कांग्रेस की मौजूदा सांसद प्रभा किशोर तविआड शामिल हैं। मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रहे भरत सिंह सोलंकी, दिनशा पटेल और तुषार चौधरी भी अपनी सीटों पर मज़बूत दिखाई दे रहे हैं।
चुनावी विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि जातीय समीकरणों की वजह से कांग्रेस को सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात की कुछ सीटों पर फ़ायदा हो सकता है। हालांकि कांग्रेस गुजरात में कमज़ोर है और उसके पास कार्यकर्ताओं की कमी है। यही कारण है कि कांग्रेस गुजरात की कई शहरी सीटों पर पहले से ज़्यादा ख़राब प्रदर्शन करती दिख रही है।
मोदी का मिशन 26
नरेंद्र मोदी जानते हैं कि इस चुनाव में 272 सीटें जुटाना लोहे के चने चबाने जैसा है। इसलिए वह अपने घरेलू मैदान पर सबसे ज़्यादा स्कोर करना चाहते हैं।
सरदार और गुजराती अस्मिता की गुहार लगाकर वोट मांग रहे मोदी गुजरातियों से कह रहे हैं, ''60 साल बाद गुजरात के पास अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाने का मौका आया है।"
मोदी ने गुजरात के अमरेली में हुई अपनी अंतिम रैली में कहा, "मैं दिल्ली में रहूंगा तो आपकी आवाज़ सुनाई देगी। हम पिछले 60 साल से पछता रहे हैं। सरदार पटेल प्रथम प्रधानमंत्री बने होते तो ग्रामीण लोग और किसान आज ज़्यादा ख़ुश होते। अब सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने और सरदार की मातृभूमि के इस बेटे को एक मौका देने का समय है।"
सरदार पटेल के नाम पर वोट
गुजरात में मोदी का मुख्य समर्थन पटेल मतदाताओं से आता है जिनके सबसे लोकप्रिय नेता सरदार पटेल हैं। मोदी पिछले काफ़ी समय से ख़ुद को सरदार के समान बता रहे हैं और लोगों से वोट मांग रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार राजीव शाह कहते हैं, "मोदी ने यह कह कर वोट मांगा है कि पिछले कई सालों से गुजरात के साथ अन्याय हुआ है। लेकिन मोदी के ज़्यादातर मतदाता आज भी उन्हें एक हिंदू मसीहा के तौर पर देखते हैं और वोट देते हैं।"
साल 2002 में हुए दंगों के बाद गुजरात मॉडल को सामने रख अपनी विकास पुरुष की छवि को बढ़ावा देने वाले मोदी बारदोली के अलावा गुजरात की क़रीब-क़रीब सभी शहरी सीटों पर मज़बूत नज़र आ रहे हैं। हालांकि कई ग्रामीण सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर की संभावना है।
भाजपा की कोशिश
गुजरात के उद्योग मंत्री सौरभ पटेल कहते हैं, "30 अप्रैल को गुजरात में रिकॉर्ड वोटिंग होगी और बीजेपी सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी।" गुजरात में मोदी के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और अभिनेता परेश रावल के लिए भी 30 अप्रैल फ़ैसले का दिन है।
रावल को मोदी ने अहमदाबाद (ईस्ट) के मौजूदा सांसद हरिन पाठक की जगह टिकट दिया है। रावल को इस वजह से भाजपा कार्यकर्ताओं का ग़ुस्सा भी झेलना पड़ा था।
वहीं आडवाणी के लिए यह चुनाव राजनीति में बने रहने का अकेला सहारा है। आडवाणी गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे वहीं से सांसद हैं। वहीं मोदी वडोदरा से चुनाव लड़ रहे है। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है।