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राजीव शुक्ला पर तिरंगे के अपमान का परिवाद

Wed, 18 Nov 2015 06:16 AM IST
Updated Wed, 18 Nov 2015 06:16 AM IST
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Complaint against Rajiv Shukla for the tricolor insult.

कानपुर के स्पेशल सीजेएम गगन भारती की कोर्ट में राजीव शुक्ला समेत दस यूपीसीए पदाधिकारियों और होटल लैंडमार्क के डाइरेक्टर के खिलाफ तिरंगे के अपमान का परिवाद दर्ज कराया गया है।

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कोर्ट ने बयान दर्ज कराने के लिए 25 नवंबर की तारीख लगाई है। टिकट खरीदने के बावजूद मैच देखने से वंचित करने के मामले में पहले ही स्पेशल सीजेएम कोर्ट और उपभोक्ता फोरम में परिवाद दर्ज हैं।
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बाबूपुरवा कालोनी निवासी एडवोकेट हर्ष कुमार ने राजीव शुक्ला, प्रेमधर पाठक, मदन मोहन मिश्रा, शोएब अहमद, अभिषेक सिंघानिया, सतीश कुमार अग्रवाल, प्रेम मनोहर गुप्ता, अशोक कुमार चतुर्वेदी, ताहिर हसन, एए खान तालिब सभी यूपीसीए पदाधिकारी और लैंडमार्क होटल के डाइरेक्टर विकास मेहरोत्रा के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है।
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हर्ष कुमार के अधिवक्ता विजय बक्शी ने कोर्ट में कहा कि 11 अक्तूबर को भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका के बीच वन डे मैच ग्रीन पार्क स्टेडियम में हुआ था। दोनों टीमों के खिलाड़ियों के रुकने का इंतजाम होटल लैंडमार्क में किया गया था।

25 नवंबर को दर्ज होंगे बयान

Complaint against Rajiv Shukla for the tricolor insult.

टीमों के होटल आने के दौरान हर्ष कुमार अपने साथी राहुल पांडेय, आनंद कुमार और शशांक श्रीवास्तव के साथ होटल के पास खड़ा था। तभी होटल के पोर्टिकों के सामने देखा कि तिरंगे के केसरी रंग के ऊपर काले रंग का पैनल कर दिया गया था। इस काले रंग के पैनल में होटल का लोगो और द लैंडमार्क टॉवर वेलकम्स यू लिखा था।

यह भी देखा कि पहले दक्षिण अफ्रीका और भारतीय तिरंगा लगा था। तिरंगा जमीन में भी छू रहा था। नियमानुसार पहले भारतीय तिरंगा और फिर दक्षिण अफ्रीका का झंडा लगा होना चाहिए था। जमीन से नहीं छूना चाहिए। कारीडोर में भी इसी तरह झंडे लगाए गए थे।

कोर्ट को बतौर सबूत वीडियो सीडी दी गई है। कहा गया है कि धारा दो प्रिवेन्शन ऑफ इन्सर्ल्ट ऑफ नेशनल ऑनर एक्ट 1971 व संशोधित अधिनियम 2003 के अंतर्गत अभियुक्तों को तलब कर दंडित किया जाए।

अपमान पर 3 साल तक की सजा
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत धारा 2 में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर 3 साल तक कैद और जुर्माना अथवा दोनों दिया जा सकता है। अगर दूसरी बार भी अपमान किया जाता है तो हर बार एक वर्ष की सजा और होगी। सजा पाने वाले को छह साल तक किसी भी तरह का चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा।

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