उपहार कांड की तर्ज पर मुआवजा देने को तैयार यूपी सरकार
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सर्वोच्च अदालत से बुधवार को राज्य सरकार ने कहा कि 20 वर्ष से अधिक उम्र के मृतकों के आश्रितों को 10-10 लाख का मुआवजा देने को राजी है। जबकि बीस साल के कम उम्र के मृतकों के परिजनों के लिए साढ़े सात लाख रुपये का मुआवजा देने को तैयार है। मगर प्रदेश सरकार का कहना है कि मुआवजे की रकम का 85 प्रतिशत आयोजकों से दिलाया जाए जबकि शेष 15 प्रतिशत मुआवजे का भुगतान राज्य सरकार करेगी, जैसा कि उपहार मामले में किया गया था।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ के समक्ष प्रदेश सरकार के अधिवक्ता अनुव्रत शर्मा की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। हालांकि पीठ राज्य सरकार के इस जवाब पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी।
सर्वोच्च अदालत ने ही गत वर्ष 4 मई को याचिकाकर्ता संजय गुप्ता के आवेदन पर कहा था कि उपहार के अनुरूप ही विक्टोरिया पार्क में मरने वालों के परिजनों और गंभीर रूप से घायल होने वालों को मुआवजा मिलना चाहिए। गुप्ता के इस आवेदन पर अदालत ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। याद रहे कि इस अग्निकांड में 64 लोगों की मौत हो गई थी और 81 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
प्रदेश सरकार की ओर से दायर किए गए हलफनामे में कहा गया है कि इस घटना में मरने वालों के परिजनों को 7.5 से 10 लाख तक का मुआवजा देने को सरकार तैयार है। इसके अलावा इस घटना की वजह से जो लोग भयंकर बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। उन्हें भी इस दायरे में रखकर मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि उन्हें दो लाख रुपये का मुआवजा पहले दिया जा चुका है।
हलफनामे में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपहार कांड मामले में हर मृतक को कम से कम 10 लाख रुपये का मुआवजा देना तय किया है। उसी तरह का उपचार विक्टोरिया पार्क के पीड़ितों को देने के लिए सरकार तैयार है। मगर इस मुआवजे की राशि का 85 प्रतिशत आयोजकों से पीड़ितों को दिलाया जाए और राज्य सरकार मुआवजे की शेष राशि का भुगतान करने को तैयार है।
राज्य सरकार ने अग्निकांड में अपंग हुए व्यक्तियों को बढ़ाकर मुआवजा देने के बारे में कुछ नहीं कहा है। यह जरूर स्पष्ट किया है कि अपंग हुए लोगों के मामले में यथा-स्थिति बरकरार रखी जाएगी। हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार को जस्टिस ओपी गर्ग की रिपोर्ट पीठ के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया था।