दंगा: हर मृतक के आश्रित को 15 लाख रुपए मुआवजा
मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों में मारे गए लोगों के परिजनों को उत्तर प्रदेश सरकार और मुआवजा मुहैया कराएगी।
सर्वोच्च अदालत से बृहस्पतिवार को राज्य सरकार ने कहा कि दंगों के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों के मुआवजे में तीन लाख रुपये की बढ़ोतरी की जा रही है। अब हर मृतक के आश्रित को 15 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। पहले यह राशि 12 लाख रुपये थी, जिसमें केंद्र की ओर से मुहैया कराए गए दो लाख शामिल हैं।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के वकील उदय ललित ने कहा कि एक को छोड़कर बाकी सभी मृतकों के परिजनों को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई थी।
मुआवजे में भेदभाव के आरोप पर मांगा जवाब
राज्य सरकार की ओर से सभी को दस-दस लाख रुपये मुहैया कराए जा चुके हैं। इसमें से दस लाख रुपये प्रदेश सरकार और दो लाख रुपये केंद्र सरकार को देने थे। लेकिन दंगों में मारे गए एक पत्रकार के परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की गई थी। इस कारण सभी को समान मुआवजा देने का राज्य सरकार ने निर्देश दिया है।
याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि मुजफ्फरनगर दंगों में मारे गए लोगों के आश्रितों को मुआवजे में भेदभाव के आरोप पर वह स्थिति स्पष्ट करे।
सुप्रीम कोर्ट ने दंगों में मारे गए एक पत्रकार तथा अन्य मृतकों को दिए मुआवजे में अंतर की बात सामने आने पर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। सभी 65 मृतकों के परिजनों को यह राशि प्रदान की जाएगी।
नहीं बख्शे जाएंगे बलात्कार के अभियुक्त: सरकार
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया कि दंगों के दौरान महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले दरिंदों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
बलात्कार के अभियुक्तों की अभी तक गिरफ्तारी न होने पर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि जब भी पुलिस ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए दबिश डाली, उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अभियुक्तों के पक्ष में महिलाएं आगे आ गईं जिसके कारण पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।
राज्य सरकार का यह बयान सुप्रीम कोर्ट को संतोषजनक नहीं लगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की दलील हमेशा दी जा सकती है। क्या पुलिस वाकई इतनी कमजोर है कि वारदात के लंबे अरसे के बाद भी अभियुक्तों पर हाथ नहीं डाल सकी है।
इस पर राज्य सरकार के वकील ने माना कि गिरफ्तारी में देरी हुई है। पुलिस ने बलात्कार के छह मामले दर्ज किए थे। इसमें से एक मुकदमा बंद कर दिया गया है।
बलात्कार की कथित शिकार महिला के मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान के बाद यह मामला रद्द किया गया। बाकी पांच मामलों में जांच जारी है। सरकार ने बलात्कार की शिकार महिलाओं के नाम उजागर होने पर भी खेद व्यक्त किया।
'फेसबुक पर गलत फोटो से भड़के दंगे'
उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च अदालत से बृहस्पतिवार को कहा कि फेसबुक पर एक गलत फोटो डालने के कारण मुजफ्फरनगर व उसके आसपास के क्षेत्र में दंगे भड़के। यह फोटो अफगानिस्तान का था जहां दो लड़कों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया था।
दंगों के दौरान यह अफवाह फैलाई गई कि मुजफ्फरनगर के दो लड़कों को एक विशेष समुदाय के लोगों ने सरेआम मार डाला। उसके बाद हिंसा भड़की। राज्य सरकार ने फेसबुक से उस सर्वर का पता लगाने के लिए कहा है जहां से फोटो लोड की गई। लगातार दो दिन चली सुनवाई 20 फरवरी को भी जारी रहेगी।