सिकंदराराऊ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश
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सिकंदराराऊ में प्रशासन भले ही स्थिति सामान्य और नियंत्रण में होने का दावा कर रहा हो, लेकिन वहां अभी हालात सामान्य नहीं हैं। बुधवार सुबह वहां फिर एक खोखा जलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।
गैंगरेप पीड़िता की मौत के बाद से ही जिला प्रशासन ने इसे लेकर कसरत शुरू कर दी थी कि वहां के हालात नहीं बिगड़ें, लेकिन उसकी कसरत बेकार ही गई। खुफिया नेटवर्क फेल साबित हुआ और हालात बिगड़ गए। बुधवार को हालांकि कस्बे के बाजार खुले, लेकिन आम लोगों के चेहरे पर दहशत ही दिखाई दी।
अभी भी कस्बे के हालात ऐसे ही हैं कि न जाने कौन सी चिंगारी फिर शोला बन जाए और कस्बा सुलग उठे। पूरे कस्बे में सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति है। बुधवार को एक पक्ष का टकराव पुलिस-प्रशासन से हो गया था, इसलिए वह मुखर नहीं हो पाया, वरना अराजक तत्वों की कोशिश यही थी कि माहौल दो समुदायों के बीच टकराव के चलते बिगड़ जाए।
मंगलवार को हुई जमकर हिंसा
सिकंदराराऊ में मंडल भर का फोर्स तैनात है। अधिकारी डेरा जमाए हुए पड़े हैं। कस्बे में मंगलवार को जमकर हिंसा हुई। भीड़ का टकराव पुलिस से हुआ। वहां जमकर पथराव, आगजनी और फायरिंग हुई। इसके निशान बुधवार को भी कस्बे में देखे गए। कस्बे का बाजार हालांकि बुधवार को खुल गया, लेकिन लोगों के दिलो-दिमाग पर मंगलवार की घटना छायी रही। यहां यह तथ्य उल्लेखनीय है कि गैंगरेप की पीड़िता की मौत के बाद जब जाम लगा तो अराजक तत्वों की कोशिश यह थी कि इस पूरे घटनाक्रम सांप्रदायिक हिंसा में बदला जाए।
कुछ लोग इसका पूरा इंतजाम करके भी आए थे। कई घंटे इसे लेकर तैयारियां भी चली थीं, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी खुफिया नेटवर्क फेल ही रहा था। हालांकि मंगलवार को जब नारेबाजी हुई तो वहां सांप्रदायिकता की झलक दिखाई दी, लेकिन इस दौरान अधिकारियों से भीड़ का टकराव हो गया और भीड़ की पुलिस प्रशासन से भिड़ंत हो गई। वैसे एक पक्ष के खोखों और ढकेलों में आग लगाई गई। माहौल को सांप्रदायिक हिंसा का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन यह हिंसा पुलिस और प्रशासन के खाते में पंहुच गई। उसके बाद जो कुछ हुआ, उससे पूरा कस्बा सहमा-सहमा दिखाई दिया। अब कस्बे में हर तरफ फोर्स तैनात है।
ऐसे में भी अफवाहें फैलाकर अराजक तत्व माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सुबह सिकंदराराऊ में एक खोखा फिर जलाया गया। सवाल यह है कि जब तक पुलिस फोर्स तैनात है। तब तक तो वहां तनाव भरी खामोशी है। ऐसे में अराजक तत्व खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं हैं कि कस्बे का माहौल फिर नहीं बिगड़ेगा। देखने को तो कस्बे में सब कुछ सामान्य ही है, लेकिन अंदरखाने हालात वहां अभी भी सामान्य नहीं हैं।
लापरवाही पर कोतवाल सस्पेंड
डीआईजी अलीगढ़ सत्येंद्र वीर सिंह ने माना कि सिकंदराराऊ में गैंगरेप की पीड़िता की मौत के बाद कोतवाली पुलिस ने लापरवाही बरती है। उन्होंने यहां कोतवाली में कहा कि पोस्टमार्टम के पश्चात कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में मृतका का अंतिम संस्कार कराना चाहिए था। इसी गलती को लेकर कोतवाल आरके सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस गैंगरेप के सभी आरोपियों को गिरफ्तार करेगी। बवाल करने वालों की भी गिरफ्तारी की जाएगी।
डीआईजी ने कोतवाली में हुई वार्ता में कहा कि पीड़िता की मौत के पश्चात रिपोर्ट दर्ज कराने में परिजनों ने काफी समय लगा दिया। इससे पुलिस को आरोपियों की गिरफ्तारी का पूरा मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि तदुपरांत पुलिस ने काफी तत्परता दिखाते हुए दो नामजदों को गिरफ्तार कर लिया। चार नामजदों में बाकी बचे दो नामजदों को 24 घंटे में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अज्ञात नामजदों के विषय में पता किया जा रहा है कि वे कौन थे।
डीआईजी ने कहा कि जिस तरह के तख्तियां हाथ में लेकर महिलाएं प्रर्दशन में सम्मिलित थीं, वो हाई प्रोफाईल तरीका है और स्थानीय स्तर पर संदेह पैदा कर रहा है। बवाल करने वालों को वीडियो फुटेज एवं फोटो के आधार पर चिन्हित कर लिया गया है। सभी के खिलाफ कड़ी धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। शीघ्र एक विशेष अभियान चलाकर गिरफ्तारियां कराई जाएंगी। असामाजिक तत्वों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।