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सिर्फ 5 रुपए के विवाद में गई जान, सांप्रदायिक बवाल

Sat, 04 Jul 2015 02:02 PM IST
Updated Sat, 04 Jul 2015 02:02 PM IST
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Communal Tension after killed a man in Baghpat.

बागपत के सिंघावली अहीर में मात्र पांच रुपये के विवाद में खूनी संघर्ष हो गया और एक की जान चली गई। बाद में मामले ने सांप्रदायिकता का रंग ले लिया।

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सिंघावली अहीर गांव में रोजा इफ्तारी के लिए सामान लेने गए युवक सद्दाम से की गई मारपीट के बाद हुए सांप्रदायिक बवाल में घायल बुंदू को मेरठ अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। लोगों ने बुंदू के शव को सिंघावली अहीर पुलिया पर लाकर रखा और मेरठ-बागपत रोड पर जाम लगा दिया।
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मौके पर पह़ुंचे पुलिस अधिकारियों के साथ लोगों की खूब नोकझोंक हुई। लोगों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने और आरोपियों को खुला छोड़ देने का आरोप लगाते हुए तीन घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम रखा। प्रभारी डीएम द्वारा मुआवजे और एक व्यक्ति को नौकरी की संस्तुति का आश्वासन दिए जाने के बाद जाम खोला गया। घटना से तनाव की स्थिति बनी हुई है।
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गुरुवार की शाम को बुंदू अपने भतीजे सद्दाम के साथ रोजा इफ्तारी के लिए फल, बर्फ और अन्य सामान लेने के लिए राजू हलवाई की दुकान पर गए थे। बर्फ के पांच रुपये के विवाद में उनके बीच झगड़ा हो गया था। बाद में उनके बीच संघर्ष हो गया था।

इस मामले में बुंदू और सद्दाम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मेरठ अस्पताल ले जाते समय बुंदू की मौत हो गई। परिजन सुबह करीब साढ़े पांच बजे शव लेकर गांव पहुंचे। आरोप है कि बुंदू की मौत होने की सूचना पुलिस को मेरठ से ही फोन पर दे दी गई। लेकिन दो घंटे बाद भी पुलिस मृतक के घर पर नहीं पहुंची।

घटना के बाद से गांव में तनाव

Communal Tension after killed a man in Baghpat.

इसके विरोध में सैकड़ों लोग शव को लेकर सिंघावली अहीर पुलिया पर पहुंचे। वहां पर उन्होंने शव को रखकर जाम लगा दिया। पुलिस ने शव को रोड से उठाने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिस से जमकर नोकझोंक हुई। पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई गई।

तीन घंटे बाद सुबह नौ बजे प्रभारी डीएम राकेश कुमार मालपाणी वहां पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। लोगों ने उनके सामने तीन मांगें रखीं, हत्यारोपियों की तुरंत गिरफ्तारी हो, मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिले, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। लापरवाह पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई।

प्रभारी डीएम ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगें शासन को भेजी जाएंगी। उनके आश्वासन पर लोगों ने शव रोड से उठने दिया। एसपी शरद सचान का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है। परिवार के कई लोगों को थाने लाया गया है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाएगी।

दो भाइयों समेत पांच के खिलाफ एफआईआर
बुंदू के भाई अब्दुल सत्तार ने सिंघावली अहीर थाना पर तहरीर दी कि उनका भाई बुंदू, भतीजे सद्दाम के साथ दुकान पर सामान लेने गए थे। वहां पर पहले से ही लोग बैठे हुए थे। उन्होंने साजिश के तहत बुंदू और सद्दाम पर लाठी-डंडों, ईंट-पत्थर से हमला कर दिया।

बाद में बुंदू पर लोहे की रॉड से हमला किया गया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी तहरीर पर दो सगे भाई सुमित, नितिन के अलावा कुलदीप उर्फ कबाड़ी, मनोज और नितिन पुत्र शेर सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई।

गांव में पुलिस-पीएसी तैनात
घटना से गांव में तनाव बना हुआ है। दहशत में कई परिवार अपने मकानों में ताले लगाकर चले गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर गांव में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है।

आखिर कैसे बिगड़े इलाके में हालात?

Communal Tension after killed a man in Baghpat.

सिंघावली अहीर गांव में पुलिस की लापरवाही के चलते सांप्रदायिक बवाल हुआ और एक व्यक्ति की जान चली गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया होता तो जान भी बच सकती थी और मामला भी नहीं भड़कता। हलवाई की दुकान पर हुए विवाद की दी गई सूचना पर ही पुलिस पहुंच जाती तो मामला इतना न बढ़ता।

लोगों का कहना है कि हलवाई की दुकान पर हुए झगड़े की सूचना पुलिस को तुरंत दे दी गई थी। लेकिन पुलिस एक घंटे देरी से वहां पर पहुंची। इतना ही नहीं शुक्रवार सुबह चार बजे बुंदू के मरने की सूचना भी दी गई, लेकिन पौने छह बजे तक भी पुलिस वहां पर नहीं पहुंची।

परिजनों का कहना है कि गुरुवार देर शाम राजू की दुकान पर जिस समय कहासुनी हो रही थी, उसी समय पुलिस को सूचना दी गई थी। लेकिन पुलिस वहां पर तब पहुंची जब आरोपी जानलेवा हमला करके आसानी से फरार हो गए। उस समय भी दो-तीन पुलिसवाले ही वहां पर पहुंचे थे। थाना प्रभारी ने तो वहां पर आने की जरूरत ही नहीं समझी थी। जब सब कुछ हो चुका था तब चार घंटे बाद रात 11 बजे थानाध्यक्ष गांव में पहुंचे थे।

पुलिस के लापरवाह रवैये से बढ़ा बवाल

Communal Tension after killed a man in Baghpat.

सुबह चार बजे बुंदू के मरने की सूचना मेरठ से ही पुलिस को फोन करके दे दी गई और कहा गया कि शव को गांव में लाया जा रहा है। उसके बाद भी पुलिस वहां पर नहीं पहुंची।

इसी के विरोध में बुंदू पक्ष के लोगों ने बागपत-मेरठ मार्ग पर जाम लगाया। जबकि उनका इस तरह का कोई इरादा नहीं था। लेकिन पुलिस ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी। आरोप है कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। यदि पुलिस कोशिश करती तो अभी तक आरोपियों को पकड़ लेती।

इस बारे में एसपी शरद सचान का कहना है कि पुलिस की कोई लापरवाही नहीं रही है। पुलिस सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची थी। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से गलत है।

लापरवाही दर लापरवाही
1- विवाद की सूचना पर नहीं पहुंची पुलिस
2-रात तक कोई पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा
3- पुलिस ने पीड़ितों की तहरीर तक फाड़ी
4- थाने से ही धमकाकर भगा दिया गया
5- गांव में तैनात पुलिस रात में चली गई
6- बवाल में घायलों के साथ एक भी पुलिसकर्मी नहीं भेजा
7-पुलिस ने सुबह तक घायलों के बारे में पता नहीं किया
8-घायल के मरने की सूचना देने के दो घंटे तक पुलिस सोती रही
9-बवाल के बाद भी पुलिस ने एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा
10-एसपी घटना से दूर सिंघावली अहीर थाने के सामने ही खड़े रहे

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