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चुनाव में पैसे की ताकत जाननी हो तो गुर्जरों से पूछिए!

Thu, 27 Mar 2014 04:39 PM IST
हरवीर सिंह/अमर उजाला, अमरोहा।
हरवीर सिंह/अमर उजाला, अमरोहा। Updated Thu, 27 Mar 2014 04:39 PM IST
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comersial sucsess makes new gurjar politics

पश्चिमी यूपी में भले ही गुर्जरों की संख्या चुनाव परिणाम बदलने की ताकत नहीं रखती, लेकिन डेयरी, ट्रांसपोर्ट, खनन और कंस्ट्रक्शन बिजनेस में मोटी कमाई कर अमीर बने कई उम्मीदवार इस क्षेत्र से लोक सभा पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली-एनसीआर से आने वाले इन गुर्जर उम्मीदवारों के मामले में पार्टियों की कोई बाधा नहीं है।

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यही वजह है कि कैराना, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और अमरोहा लोकसभा सीटों से गुर्जर उम्मीदवार मैदान में हैं। यह राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से ताल्लुक रखते हैं। कैराना सीट से बात शुरू करें। यहां से सभी प्रमुख पांच उम्मीदवार गुर्जर हैं।
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रालोद के टिकट पर लड़ रहे करतार भड़ाना फरीदाबाद से हैं और माउंट कैलाश ब्रांड नाम के बोतलबंद पानी की कंपनी के मालिक हैं। इनका ट्रांसपोर्ट का भी कारोबार है। भाटी माइंस में उनका खनन का कारोबार भी था। वह कहते हैं कि वह समाज सेवा के लिए राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘पिछले जन्म का कुछ कर्ज होगा जिसे मैं कैराना में आकर उतार रहा हूं।’ वह इस समय मुजफ्फनगर की खतौली सीट से रालोद के विधायक भी हैं।

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पश्चिमी यूपी में सभी पार्टियों ने दिए टिकट

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कैराना सीट से भाजपा उम्मीदवार हुकुम सिंह भी गुर्जर हैं और ‘आप’ के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुनील कसाना भी गुर्जर हैं। कसाना का दिल्ली में बिल्डर कारोबार है। इसी सीट पर सपा ने मुसलमान गुर्जर नाहिद हसन और बसपा ने कुंवर हसन को उतारा है। वहीं बिजनौर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मलूक नागर डेयरी उद्योग चलाते हैं।

उनको पैसे के मामले में काफी मजबूत माना जा रहा है। रालोद की उम्मीदवार अभिनेत्री जया प्रदा और भाजपा के भारतेंदु को वह कड़ी टक्कर दे रहे हैं, जबकि यहां गुर्जर वोट करीब एक लाख ही हैं। हालांकि यहां से राणा सरिया के नाम से स्टील उद्योग चलाने वाले शाहनवाज राणा सपा के टिकट पर मैदान में हैं। राणा विधान सभा चुनाव में रालोद के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़े थे।

बागपत से अजित सिंह के सामने बसपा टिकट पर चुनाव लड़े प्रशांत चौधरी गुर्जर हैं और उनका कंस्ट्रशन का बिजनेस है। प्रशांत चौधरी के बारे में खेकड़ा के दयानंद धामा कहते हैं कि कम गुर्जर वोटों के बावजूद उनकी पत्नी हेमलता बागपत से रालोद प्रत्याशी कोकब हमीद को हराकर बसपा के टिकट पर विधायक बनी हैं।

सबसे अधिक संपत्ति वाले तंवर भी मैदान में

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बहुचर्चित गुर्जर नेता कंवर सिंह तंवर अमरोहा से भाजपा के टिकट पर मैदान में है। तंवर अक्सर सबसे अधिक संपत्ति वाले उम्मीदवारों में शुमार होते हैं। इनके बारे में भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत कहते हैं, ‘हमने किसानों के लिए जो काम किया वह पैसे पर भारी पड़ेगा।’

दिलचस्प बात यह है कि नोएडा से बसपा के मौजूदा सांसद सुरेंद्र नागर भी अमरोहा से भाजपा के टिकट के मजबूत दावेदार थे। सुरेंद्र नागर पारस डेयरी के मालिक हैं। दिल्ली एनसीआर से ताल्लुक रखने वाले कारोबारी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनाव मैदान में डेयरी, ट्रांसपोर्ट, कंस्ट्रक्शन और खनन के धंधों से अमीर बने हैं लोग चुनाव मैदान में हैं।

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