फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   collegium system will be restored

लागू होगा 'अपारदर्शी' कॉलेजियम सिस्टम: जेटली

Sat, 24 Oct 2015 12:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Oct 2015 12:00 PM IST
विज्ञापन
collegium system will be restored

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को असंवैधानिक करार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करने के बावजूद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सरकार शीर्ष अदालत के अपारदर्शी कोलेजियम सिस्टम को बहाल करने के आदेश को लागू करेगी, लेकिन जजों की नियुक्ति के लिए बेहतर सिस्टम की जरूरत पर बहस जारी रहेगी।

विज्ञापन


जेटली ने कहा कि सरकार एनजेएसी के खत्म होने के बाद की दिशा में बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सही या गलत जो भी फैसला दिया है उस फैसले को लागू करना होगा, तभी व्यवस्था बनी रहेगी। लेकिन, एक बेहतर सिस्टम के लिए चर्चा हमेशा जारी रहेगी। पूर्व कानून मंत्री और जानेमाने वकील जेटली ने एक टीवी चैनल पर एनजेएसी के मसले पर पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरएम लोढ़ा के साथ चर्चा में यह बात कही।
विज्ञापन


पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बहस में जेटली का समर्थन किया। हालांकि, वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने लोढ़ा का साथ दिया। जस्टिस लोढ़ा ने स्वीकार किया कि कोलेजियम सिस्टम अपारदर्शी है और उसे पारदर्शी बनाने के लिए सुधार की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

जेटली ने की थी आलोचना

collegium system will be restored

गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू ने कहा था कि सरकार फैसले को स्वीकार करने को लेकर पूरी तरह परिपक्व है। ऐसे में जेटली का यह बयान काफी मायने रखता है। एनजेएसी को असंवैधानिक करार दिए जाने के दिन जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट में फैसले की आलोचना की थी।

उन्होंने कहा था कि ऐसा कोई संवैधानिक सिद्धांत नहीं है कि लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं को निर्वाचित प्रतिनिधियों से बचाने की बात करता हो। हालांकि इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि ये विचार उनके निजी हैं। जेटली के अलावा कानून मंत्री सदानंद गौड़ा और दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की थी।

चर्चा के दौरान जेटली ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल विशेषता है, लेकिन संसद की स्वायत्तता और शक्तियों के बंटवारे जैसी विशेषताओं को छोड़ा नहीं जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed