जजों की नियुक्ति प्रक्रिया का प्रारूप तैयार करने की स्थिति में नहीं सरकार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह फिलहाल जजों की नियुक्ति प्रक्रिया का प्रारूप तैयार करने की स्थिति में नहीं है। कोलेजियम पर मांगे गए सुझावों पर दो दिन चली बहस के बाद शीर्ष अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
शीर्ष अदालत ने एक बार फिर से दोहराया कि कोलेजियम चाहे तो जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। कोलेजियम के अपना काम करने पर कोई पाबंदी नहीं है।
शीर्ष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गुरुवार को न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि सरकार के लिए जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया का प्रारूप बनाना फिलहाल संभव नहीं है क्योंकि यह अब तक अदालती बहस का हिस्सा है। जब तक अदालती कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक सरकार के लिए प्रारूप तैयार करना संभव नहीं है।
हालांकि संवैधानिक पीठ ने कहा कि प्रारूप तैयार करना गलत नहीं है। अगर प्रक्रियात्मक बदलाव करना है, तो सरकार अभी कर सकती है। कोलेजियम को लेकर सरकार के पास करीब 3500 सुझाव आए थे। सुझाव देने वालों में वकील और सेवानिवृत्त जज भी हैं। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के एक वर्तमान जज ने भी अपना सुझाव भेजा है।