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कोलेजियम तय करे कि जज नियुक्त करने हैं या नहीं: SC

Thu, 05 Nov 2015 11:02 PM IST
Updated Thu, 05 Nov 2015 11:02 PM IST
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Collegium decide Judges appoint or not said Supreme Court

प्रीम कोर्ट ने कोलेजियम से नियुक्ति का फैसला कोलेजियम पर ही छोड़ दिया है। न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने गुरुवार को कोलेजियम सिस्टम को लेकर किसी तरह का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि यह भारत के प्रधान न्यायाधीश और शीर्ष अदालत के वरिष्ठ जजों पर है कि वह कोलेजियम के तहत जजों की नियुक्ति करना चाहते हैं या इसके लिए कोलेजियम सिस्टम में सुधार को लेकर चल रही कवायद के पूरा होने का इंतजार करते हैं।
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संवैधानिक पीठ ने कहा कि हम कोलेजियम सिस्टम पर कुछ नहीं बोलना चाहते क्योंकि यह हमारा काम नहीं है। इस पर कोलेजियम विचार करेगा। हमारा सिर्फ यह मकसद है कि इसमें किसी तरह की देरी न हो। य
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ह मसला सुनवाई के दौरान तब उठा जब वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन ने पीठ के समक्ष कहा कि कोलेजियम को अपना काम शुरू कर देना जाना चाहिए और जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को अपनी वेबसाइट पर कोलेजियम पर लोगों से सुझाव मांगने के लिए कहा। उनका कहना था कि कोलेजियम को अपना काम करने देना चाहिए और साथ ही सुझाव लेने का सिलसिला जारी रहना चाहिए।

पीठ ने मांगा सुझाव

Collegium decide Judges appoint or not said Supreme Court

कई अन्य वकीलों ने भी नरीमन का समर्थन किया। उनका कहना था कि विभिन्न हाईकोर्ट में जज के करीब 300 पद रिक्त हैं। इसके कारण लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

हालांकि वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नई नियुक्तियां तब तक नहीं होनी चाहिए जब तक संवैधानिक पीठ कोलेजियम सिस्टम में सुधार पर अपना निर्णय नहीं ले लेती।

दलीलों को सुनने के बाद संवैधानिक पीठ ने स्पष्ट किया कि वह कोलेजियम सिस्टम को लेकर कुछ नहीं कहने जा रही है। जस्टिस जेएस खेहड़ भी वर्तमान कोलेजियम का हिस्सा हैं।

हालांकि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह तब तक कोलेजियम का हिस्सा नहीं होंगे, जब तक इसमें सुधार के मसले का निपटारा नहीं हो जाता। संवैधानिक पीठ ने सरकार से कहा है वह कोलेजियम में सुधार के लिए आम लोगों से कानून मंत्रालय की वेबसाइट पर सुझाव मांगे।

साथ ही पीठ ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया से बैठक कर इस संबंध में अपनी बात रखने केलिए कहा है। पीठ ने साफ किया कि वह कोलेजियम के लिए नए मानक तय नहीं करने जा रही है। सभी कुछ 90 के दशक में नौ जजों द्वारा दिए गए दो फैसले के दायरे में होगा।

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