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कोलगेट कांड का असर दिखने लगा है बिजली पर

Tue, 14 May 2013 11:09 PM IST
हरीश लखेड़ा
हरीश लखेड़ा Updated Tue, 14 May 2013 11:09 PM IST
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colgate scam impact on power

देश का सियासी तापमान गरमाने वाले कोलगेट कांड का असर अब बिजली आपूर्ति पर भी दिखने लगा है।

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देश भर के सभी थर्मल पावर प्लांटों को बिजली पैदा करने वाली टरबाइनें चलाने के लिए जरूरत भर कोयला उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

नतीजतन, थर्मल प्लांटों का बिजली उत्पादन 30 फीसदी तक घट गया है। इससे अब भीषण गरमी के मौसम में बिजली गुल होने का खतरा बढ़ सकता है।

केंद्र सरकार भी मानती है कि यदि ये सभी कोल ब्लॉक तय समय के अनुसार कोयला उत्पादन करने लगते तो बिजली क्षेत्र का ईंधन संकट काफी हद तक दूर हो सकता था।

कोयला मंत्रालय ने 218 ब्लॉक में से 178 कोल ब्लॉक आवंटित किये थे। लेकिन ज्यादातर ने समय पर उत्पादन शुरू तक नहीं किया। घोटाला उजागर होने पर अब कई का आवंटन भी रद्द हो चुका है।

केंद्रीय बिजली मंत्रालय के रिकार्ड गवाह हैं कि पिछले साल बिजली क्षेत्र के लिए 5.94 करोड़ टन कोयले का इंतजाम नहीं हो पाया।

कोयला मंत्रालय ने बिजली क्षेत्र को 40.32 करोड़ टन कोयला उपलब्ध कराना था। लेकिन 2.77 करोड़ टन कोयला आयात करने पर भी मात्र 34.38 करोड़ टन कोयला ही मुहैया हो पाया। स्थिति अब और भी खराब हो चली है।
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केंद्र सरकार के उपक्रम एनटीपीसी के एक अफसर ने माना कि प्लांटों के लिए कोयले की भारी कमी चल रही है और इससे बिजली उत्पादन घटा है।

पूर्व विद्युत मंत्री सुरेश प्रभु ने अमर उजाला से कहा कि यदि सही तरीके से कोल ब्लॉक आवंटित होते व उनसे समय पर कोयला निकलने लगता तो आज ईंधन का यह संकट नहीं पैदा होता।
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बिजली क्षेत्र का संकट एक तरफा नहीं है। प्लांट कोयले के साथ ही गैस की कमी से भी जूझ रहे हैं, जबकि दर्जनों जल विद्युत परियोजनाएं पर्यावरण संबंधी विवादों में उलझी हैं।


केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में अब भी लगभग 10 फीसदी बिजली की कमी है और अब ईंधन की कमी के चलते प्लांटों का उत्पादन घट जाने से बिजली संकट बढ़ता जा रहा है।

गैस आधारित सभी 53 प्लांट गैस की कमी से जूझ रहे हैं। गैस आधारित प्लांटों को सालाना 86.07 एमएमएससीएमडी गैस की जरूरत होती है।

मगर पिछले चार साल के दौरान क्रमश: 55.46, 59.31, 56.28 और 51.02 एमएमएससीएमडी गैस ही मिल पाई।

इससे 17,721.47 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता वाले इन प्लांटों से हर साल औसतन 9300 मेगावाट बिजली मिल पाई।

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