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रबी फसलों पर कड़कड़ाती ठंड मेहरबान

Sat, 05 Jan 2013 07:39 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 05 Jan 2013 07:39 PM IST
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cold helpful for rabi crops

कड़कड़ाती ठंड ने भले ही आम आदमी की परेशानियां बढ़ा दी हों। लेकिन फसलों के लिहाज से मौसम का यह मिजाज बेहद अच्छा है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में कमी का असर न सिर्फ गेहूं की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक होगा। बल्कि मोटे अनाज, दलहन और तिलहनों के लिए भी अच्छा है।

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उम्मीद है कि इस वर्ष भी गेहूं का उत्पादन नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। मोटे अनाज और दलहनों का उत्पादन भी पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ सकता है। इससे खरीफ फसलों के नुकसान की भरपाई होने की उम्मीद बनने लगी है।
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कृषि मंत्रालय के मुताबिक चालू रबी सीजन में शुक्रवार तक 567 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो चुका है। जो गत वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले लगभग सात लाख हेक्टेयर अधिक है। हालांकि इस वर्ष गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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पिछले वर्ष के 165 रुपये के मुकाबले इस वर्ष सरकार ने सिर्फ 65 रुपये प्रति क्विंटल की ही बढ़ोतरी की है। इसके बावजूद किसानों का रुझान गेहूं की बुवाई में बना हुआ है। इसके चलते अब तक 286.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। पिछले वर्ष इस अवधि में गेहूं की बुवाई सिर्फ 281.80 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जिस रफ्तार से बुवाई चल रही है उससे उम्मीद है कि इस साल भी गेहूं की न सिर्फ बंपर पैदावार होगी बल्कि उत्पादन पिछले वर्ष के स्तर तक पहुंच सकता है। अन्य फसलों की बुवाई भी अच्छी चल रही है।


मोटे अनाजों की बुवाई 59.14 लाख हेक्टेयर, दलहनों की बुवाई 136.05 लाख हेक्टेयर और तिलहनों की बुवाई 81 लाख हेक्टेयर के करीब हो चुकी है। जिन क्षेत्रों में रबी फसलों की बुवाई देरी से शुरू हुई है। वहां अगले महीने के अंत तक बुवाई का काम चलेगा। इससे उम्मीद है कि रबी फसलों की कुल बुवाई पिछले वर्ष से अधिक हो सकती है।

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