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मोदी की काशी को कोका कोला ने दिया झटका

Sat, 28 Feb 2015 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 28 Feb 2015 08:37 AM IST
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cocacola no to plant in varanasi.

भारत सरकार के केंद्रीय भूगर्भ जल प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने में देरी की वजह से शीतल पेय कंपनी हिंदुस्तान कोकाकोला ने यहां मेहंदीगंज में प्रस्तावित नई उत्पादन इकाई की स्थापना से हाथ पीछे खींच लिया है। कंपनी ने अब यूपी के दूसरे शहर में यह प्लांट लगाने का फैसला किया है। दो-तीन दिन के अंदर ही उस स्थान का ऐलान हो जाने की उम्मीद है जहां कोकाकोला का यह प्लांट लगेगा।

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हिंदुस्तान कोकाकोला के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (पब्लिक अफे यर्स एंड कम्युनिकेशन) कल्याण रंजन के अनुसार कोकाकोला का यह प्रोजेक्ट 145 करोड़ रुपये का था। प्लास्टिक की बोतल वाले इस प्लांट में प्रति मिनट 600 बोतल बनतीं। बताया कि इससे बनारस के सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिलता मगर कंपनी ने बनारस के प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिया है। अब यह प्रोजेक्ट यूपी के दूसरे शहर में लगेगा। स्थान का चयन दो-तीन दिन में हो जाएगा।
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रंजन ने बताया अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने में देरी की वजह से कंपनी को वित्तीय नुकसान भी हुआ है। मालूम हो कि कोकाकोला प्लांट द्वारा भूगर्भ जल दोहन से नाराज होकर स्थानीय ग्रामीणों ने पिछले दिनों जबरदस्त आंदोलन किया था। ग्रामीणों का आरोप था कि जब से यहां प्लांट लगा है खेत से लेकर कुएं तक सूख गए। आसपास का पूरा इलाका डार्क जोन में बदल गया। चर्चा है कि किसानों के विरोध को देखते हुए ही केंद्रीय भूगर्भ जल प्राधिकरण ने हिंदुस्तान कोकाकोला को एनओसी नहीं दी।

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टर्की ने भारतीय कालीनों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाई

cocacola no to plant in varanasi.

टर्की सरकार ने भारतीय कालीनों पर कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है। 18 फरवरी को टर्की में इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद से वहां के आयातकों और भारतीय निर्यातकों में खलबली मच गई। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में टर्की के राजदूत से मिल कर इससे होने वाली समस्याओं से अवगत कराया। निर्यातकों का कहना है कि इस मुद्दे पर मंत्रालय स्तर पर वार्ता होनी चाहिए।

वित्तीय वर्ष 2013-14 में भारत का कुल कालीन निर्यात 71 सौ करोड़ था। आंकड़े के अनुसार इसमें टर्की का हिस्सा लगभग 15 प्रतिशत अर्थात 1050 करोड़ है। टर्की सरकार के ताजा निर्णय से वहां भेजे जा रहे भारतीय कालीन 50 प्रतिशत तक महंगे हो जाएंगे। इसके फलस्वरूप निर्यात पर असर पड़ेगा। भदोही में कम से कम एक दर्जन निर्यातक ऐसे हैं, जो टर्की से बड़ा व्यवसाय करते हैं और वर्तमान में करोड़ों रुपये के आर्डर उनके पास हैं।

इस संबंध में अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ के मानद सचिव तनवीर हुसैन अंसारी ने कहा कि दूरगामी असर तो बाद में पड़ेगा। फिलहाल उन निर्यातकों को तगड़ा झटका लगा है जो टर्की आयातकों से रेट का अनुबंध कर माल बना रहे हैं। कहा यदि टर्की सरकार तैयार हो रहे माल की खरीद में राहत की घोषणा नहीं करती है तो बहुत से लोगों का व्यवसाय प्रभावित होगा। उधर, स्थिति पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को सीईपीसी प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में एंबेसी में टर्की के राजदूत से मिला। सीईपीसी के चेयरमैन कुलदीप राज वाटल ने बताया कि राजदूत को इसकी विशेष जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को अपनी सरकार के सामने रखने का आश्वासन दिया है।

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