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कोलगेट: सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव के खिलाफ सीबीआई
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 27 Nov 2013 12:22 AM IST
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स्वायत्तता के लिए लड़ रही सीबीआई ने कोयला घोटाला मामले में अदालत की सहायता के लिए किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को एमाइकस क्यूरे नियुक्त करने के सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव का विरोध किया है।
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सर्वोच्च अदालत ने घोटाले पर एजेंसी की जांच रिपोर्ट के विश्लेषण के लिए एमाइकस क्यूरे की नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए सीबीआई ने कहा कि किसी बाहरी को एजेंसी की कार्रवाई पर फैसले लेने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
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सीबीआई ने कहा कि सर्वोच्च अदालत कोयला घोटाले की जांच की निगरानी कर रही है। इसमें एजेंसी की सच्चाई और जांच की गति की समीक्षा किया जाना तक तो ठीक है लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को यह इजाजत नहीं दी जानी चाहिए कि वह सीबीआई की कार्रवाई के संबंध में फैसले दे।
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जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण ने कहा कि एजेंसी भला अपनी रिपोर्ट किसी बाहरी से कैसे साझा कर सकती है। जबकि कोर्ट ने खुद अटॉर्नी जनरल जैसे संवैधानिक प्राधिकारी को रिपोर्ट दिखाए जाने तक पर रोक लगा रखी है।
एजेंसी को यह आशंका है कि जब रिपोर्ट किसी बाहरी को देखने को कहेंगे तो वह जांच के अधिवीक्षण का रंग लेगी और तब सिर्फ निगरानी नहीं रह जाएगी। हालांकि एजेंसी की इन दलीलों पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता एमएल शर्मा व प्रशांत भूषण ने आपत्ति जताई।
इस मसले पर कोई हल न निकलता देख पीठ ने मामले की सुनवाई को पांच दिसंबर तक के लिए टाल दिया। पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को पीएमएलए अधिनियम के तहत उठाए गए कदमों के बारे में जवाब देने का निर्देश दिया।
साथ ही सीबीआई और सरकार को एजेंसी के निदेशक को केंद्रीय सचिव के स्तर का दर्जा देने के मुद्दे पर बैठक कर इसका समुचित हल निकालने की राय दी। याद रहे कि केंद्र ने एजेंसी के इस आग्रह को अस्वीकार कर दिया है। जबकि सीबीआई कार्यप्रणाली और प्रशासनिक स्वतंत्रता के आधार पर जरूरी बता रही है।