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कोलगेट: सीबीआई के हलफनामे से हिली सरकार

Sat, 27 Apr 2013 12:53 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 27 Apr 2013 12:53 AM IST
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coalgate cbi files affidavit in supreme court

कोलगेट पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल सीबीआई के हलफनामे ने पहले से ही कई मोर्चों पर घिरी यूपीए सरकार को जोर का झटका दिया है।

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सीबीआई ने शुक्रवार को दायर हलफनामे में माना कि कोयला आवंटन मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट कानून मंत्री अश्विनी कुमार के कहने पर उनके साथ साझा की गई।

इस रिपोर्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों को भी दिखाया गया था। सीबीआई के इस कबूलनामे के बाद सरकार सियासी बवंडर में बुरी तरह फंस गई है।

भाजपा ने जांच रिपोर्ट से संबंधित दोनों मसौदों को सदन के पटल पर रखने और प्रधानमंत्री और कानून मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग कर दी है।

हालांकि सरकार ने फिलहाल कह दिया है कि अश्विनी कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन हालात संभाल पाना सरकार के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

खतरे में कानून मंत्री की कुर्सी
कानून मंत्री की कुर्सी सीबीआई के इस हलफनामे के बाद खतरे में है। सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने 8 मार्च की स्टेटस रिपोर्ट सरकार से साझा करने की बात तो मानी लेकिन हलफनामे में उन्होंने इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया कि सरकार के कहने पर स्टेटस रिपोर्ट में कोई बदलाव किए गए थे या नहीं।
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उन्होंने सर्वोच्च अदालत से कहा कि ताजा स्टेटस रिपोर्ट को न तो सरकार के किसी महकमे को नहीं दिखाया गया है और भविष्य में भी वह ऐसा नहीं करेंगे। शुक्रवार को सभी नजरें भी सीबीआई द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे पर टिकी थीं।
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यही कारण है कि संसद भवन में मौजूद होने के बावजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित सरकार और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता सदन में हाजिरी लगाने के बदले अपने अपने दफ्तर में टीवी से चिपके रहे।

हलफनामा संबंधी सूचना आते ही सोनिया ने आनन फानन में यूपीए समन्वय समिति की बैठक बुलाई। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, रालोद के मुखिया अजित सिंह और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को फोन कर तत्काल पहुंचने का अनुरोध किया गया। बैठक में फिलहाल कानून मंत्री के बचाव का फैसला किया गया।

सूत्रों ने बताया कि सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले आगामी 30 अप्रैल की सुनवाई का इंतजार है। सरकार भी मान रही है कि कोलगेट प्रकरण में कार्यकाल के आखिरी दौर में हुए अब तक के सबसे तीखे प्रहार से उबरने की राह आसान नहीं है।

अगर 30 अप्रैल की सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कठोर रुख अपनाया तो कानून मंत्री की कुर्सी बचाना संभव नहीं रह जाएगा। हालांकि बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री और कानून मंत्री के इस्तीफे की मांग खारिज कर दी तो दूसरी ओर अश्विनी कुमार ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।

दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने दोनों मसौदों को सदन के पटल पर रखने के साथ ही प्रधानमंत्री और कानून मंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी है।

वहीं, सरकार को डर है कि कानून मंत्री का इस्तीफा लिया जाता है तो विपक्ष प्रधानमंत्री के इस्तीफे का दबाव बनाएगा। चूंकि हलफनामे में सीबीआई ने ड्राफ्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भी दिखाने की बात कही है। इसलिए विपक्ष की प्रधानमंत्री को घेरने की रणनीति मजबूत हो जाएगी।

लेकिन यहां खामोश है हलफनामा
8 मार्च को दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में सरकार के कहने पर कोई बदलाव किया गया था या नहीं, इस बारे में सीबीआई निदेशक के हलफनामे में कुछ नहीं कहा गया है।

विपक्ष का आरोप है कि सीबीआई ने स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने से पहले सरकार को दिखाई। सरकार के कहने पर सीबीआई ने इस रिपोर्ट में बदलाव कर इसे हल्का कर दिया और इस तरह प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश की गई है।

सीबीआई नया केस दर्ज करेगी
कोयला ब्लाक आवंटन में हुई अनियमितता के मामले में सीबीआई एक और नया केस जल्द दर्ज कर सकती है। सीबीआई सूत्रों ने हालांकि नई एफआईआर में आरोपित किए जाने वाली कंपनियों और लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

सूत्रों ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा उनकी पहचान सार्वजनिक करने से जांच प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के बाद कुछ ही दिनों में केस दर्ज किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में सीबीआई द्वारा की गई अब तक की जांच की आलोचना हुई है।


नया केस दर्ज होने के बाद आवंटन मामले में कुल एफआईआर 11 हो जाएंगी। जांच एजेंसी ने पूर्व में कई कंपनियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आवंटन के लिए पेश किए गए आवेदन में गलत जानकारी देने के लिए मामला दर्ज किया है।

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