फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Maharashtra Assembly Elections 2014 - Shivsena BJP Alliance in Trouble

गठबंधनों में मुद्दा हुकूमत का, सीटों का नहीं

Tue, 23 Sep 2014 12:03 PM IST
Updated Tue, 23 Sep 2014 12:03 PM IST
विज्ञापन
Maharashtra Assembly Elections 2014 - Shivsena BJP Alliance in Trouble

महाराष्ट्र के दोनों बड़े सियासी गठबंधनों में रस्साकसी जारी है। लोकसभा चुनावों की भारी जीत भाजपा शिवसेना गठबंधन पर भारी पड़ रही है।

विज्ञापन


अगर थोड़ी और तनातनी बढ़ी तो ढाई दशक से भी ज्यादा पुरानी महायुति टूट सकती है। दूसरी ओर 1999 से जारी सत्तारूढ़ कांग्रेस एनसीपी गठबंधन में भी खासी जोर आजमाइश है।

दरअसल दोनों ही गठबंधनों में यह तनातनी महज कुछ सीटों को लेकर नहीं बल्कि इस पर है कि अगले पांच साल देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर हुकूमत कौन करेगा?

मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की खाली हुई और खार इलाके की नमक बहुल वाली हजारों एकड़ जमीन के अरबों खरबों रुपए के सौदे किसके राज में होंगे। अरबों रुपए के लंबित पड़े मुंबई और महाराष्ट्र के रियल एस्टेट के प्रस्तावों और खरबों रुपए की नई विकास परियोजनाओं को मंजूरी कौन देगा। यह बड़ा मुद्दा है।
विज्ञापन


मुंबई में बसने वाले देश के कुछ चुनींदा बड़े उद्योगपतियों की पर्दे के पीछे की दिलचस्पी भी गठबंधनों का गणित उलझा रही है। इन उद्योगपतियों को महाराष्ट्र में ऐसी सरकार और ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए जो उनके हितों की न सिर्फ हिफाजत कर सके, बल्कि वो जहां और जिस पर उंगली रखें, वह उनकी झोली में डालने की गारंटी भी दे सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीजेपी-शिवसेना में नहीं बनी बात

Maharashtra Assembly Elections 2014 - Shivsena BJP Alliance in Trouble

उधर लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद उभरा भाजपा का नया नेतृत्व अभी नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर प्रदेश की सियासत में शिवसेना को अपनी बी टीम बनाकर राज्य में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की रणनीति है कि यही मौका है जब भाजपा राज्य में अपना अपेक्षित विस्तार करके गुजरात के बाद देश के एक और बड़े आथिर्क संपन्नता वाले राज्य की सत्ता पा सकती है।

भाजपा के इस इरादे ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को सियासत की राह पर लाल बत्ती दिखा दी है। उन्हें लगता है कि इससे न सिर्फ राज्य में शिवसेना का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा बल्कि शिवसेना ब्रांड राजनीति में उद्धव के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगेंगे, जिसका फायदा उनके चचेरे भाई और प्रतिद्वंदी राज ठाकरे को मिल सकता है। इसलिए उद्धव भी झुकने को तैयार नहीं हैं।

शिवसेना के एक नेता के मुताबिक कुछ और सीटें छोड़ी जा सकती हैं बशर्ते भाजपा यह वादा करे कि वह भाजपा शिवसेना गठबंधन के भावी मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे को प्रोजेक्ट करेगी। भाजपा यह वादा करने या आश्वासन देने को तैयार नहीं है। वह इस सवाल को चुनाव के बाद हल करना चाहती है।

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में भी कई पेंच

Maharashtra Assembly Elections 2014 - Shivsena BJP Alliance in Trouble

लोकसभा की करारी हार के बाद कांग्रेस एनसीपी गठबंधन भी अपने अस्तित्व से जूझ रहा है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार अपनी पुत्री सुप्रिया सूले और भतीजे अजित पवार की राजनीतिक राह आसान करने का ताना-बाना बुन रहे हैं।

केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद उन्हें राज्य की सत्ता में अपनी हिस्सेदारी हर हाल में चाहिए। इसके लिए पवार कांग्रेस पर दबाव बढ़ाकर ज्यादा सीटें इसलिए चाहते हैं कि जिससे चुनाव के बाद एनसीपी नए सत्त्ता समीकरणों में बेहतर सौदेबाजी कर सके।

सियासी सूत्रों का यह भी कहना है कि पवार कांग्रेस से गठबंधन टूटने की स्थिति में शिवसेना या भाजपा से किसी तरह की अघोषित सहमति भी बना सकते हैं। इसके लिए वह शिवसेना और भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं के संपर्क में भी हैं।

वहीं कांग्रेस नेताओं का एक गुट चाहता है कि राज्य में कांग्रेस एनसीपी से अलग लड़े। इस राय के नेताओं का मानना है कि राज्य में सत्ता विरोधी रुझान कांग्रेस के नहीं एनसीपी के खिलाफ है। इसलिए कांग्रेस अलग चुनाव लड़कर फायदे में रहेगी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सिपहसालार नेता इसी राय के हैं। इसलिए इस गठबंधन में भी दोनों खेमे अपना अपना दबाव बढ़ा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed