फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Coal scam: No need of govt approval for questioning of officers, says Supreme Court

कोलगेट जांच में सरकारी मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट खफा

Thu, 18 Jul 2013 12:23 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 18 Jul 2013 12:23 AM IST
विज्ञापन
Coal scam: No need of govt approval for questioning of officers, says Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जा रही जांच में संयुक्त सचिव या उसके ऊपर के अफसरों से पूछताछ के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य बताए जाने के मसले पर सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को एक बार फिर आड़े हाथों लिया।

विज्ञापन


बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि मंजूरी की आड़ में सरकार को जांच के महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी नहीं दी जा सकती। सीबीआई जांच रिपोर्ट सरकार से साझा नहीं कर सकती।
विज्ञापन


सर्वोच्च अदालत ने रिपोर्ट साझा करने के संबंध में सीबीआई की ओर से दायर आवेदन पर भी कड़ी नाराजगी जताई।

अदालत ने कहा कि हम पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि सरकार से एजेंसी सूचनाएं साझा नहीं करेगी। इसके बावजूद एजेंसी की ओर से इस संबंध में आवेदन दाखिल किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस मामले में सरकार से एजेंसी कोई भी रिपोर्ट साझा नहीं करेगी। अदालत इस मामले में एजेंसी को जारी किए गए आदेश में कोई बदलाव नहीं करना चाहती।

जस्टिस आरएम लोढा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई की स्वायत्तता को लेकर लाए गए प्रस्तावों पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस एस्टबलिशमेंट एक्ट की धारा 6ए के तहत मंजूरी अदालत की ओर से निगरानी के मामलों में जरूरी नहीं है।

अदालत की निगरानी में की जा रही जांच में मंजूरी स्वत: दी जानी चाहिए। पीठ ने यह बात उस समय की, जब अदालत को बताया गया कि वरिष्ठ नौकरशाहों के खिलाफ मुकदमा चलाने या उनसे पूछताछ करने के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक है।


मंजूरी तभी मिलती है जब स्वीकृति देने वाला अफसर अभियुक्त अधिकारी की संलिप्तता से संतुष्ट हो। इस कारण जांच रिपोर्ट को साझा किए बिना संलिप्तता का पता नहीं चलना मुश्किल है।

रविकांत मिश्र को जांच का जिम्मा
सुप्रीम कोर्ट ने डीआईजी रविकांत मिश्र को कोलगेट की जांच का जिम्मा सौंपा। वह 2006 से 2009 के बीच आवंटित कोल ब्लॉक में अनियमितता की जांच करेंगे।

रविकांत को आईबी से वापस बुलाकर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। दो अन्य डीआईजी अमित कुमार और बी मुर्गेसन 1995 से 2005 के दौरान हुए आवंटन की जांच करेंगे।

जांच टीम के अन्य सदस्य इनकी अगुआई में तफ्तीश आगे बढ़ाएगी। पीठ ने जांच टीम के सदस्यों की तादाद 33 से बढ़ाकर 36 कर दी।

दागी एसपी विवेक दत्त को जांच टीम से बाहर करने के सीबीआई के अनुरोध को भी अदालत ने स्वीकार कर लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed