{"_id":"ead790c25b9bd30328c8493d13f5e72c","slug":"coal-scam-cbi-lodged-fir-against-kumar-mangalam-birla","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोल घोटालाः कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ FIR","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
कोल घोटालाः कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ FIR
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 15 Oct 2013 08:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनावी मौसम के बीच कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में सीबीआई ने मशहूर उद्योगपति आदित्य बिड़ला ग्रुप के (एबीजी) के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला और उनकी कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
विज्ञापन
घोटाले की इस 14वीं एफआईआर में कुमारमंगलम के साथ पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख और कोयला मंत्रालय के कुछ अनाम अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
मामला दर्ज करने के साथ ही सीबीआई ने आदित्य बिड़ला समूह के कई प्रतिष्ठानों पर मंगलवार को दस्तावेज तथा अन्य सबूत जुटाने के लिए छापे मारे।
सीबीआई की इस ताजा एफआईआर के मुताबिक इन दोनों की मिलीभगत से सिर्फ सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों (पीएसयू) को दिए जाने वाले तालावीरा-2 कोयला ब्लॉक को निजी कंपनी हिंडाल्को को अनुचित रूप से आवंटित किया गया।
विज्ञापन
कई जगहों पर छापेमारी
उस दौरान कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास ही था। इसे देखते हुए जाहिर तौर पर भाजपा को पीएम पर निशाना साधने के लिए एक और मौका मिल गया है।
सीबीआई ने बिड़ला और हिंडाल्को के साथ पूर्व कोयला सचिव पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया है।
एफआईआर दर्ज करने के बाद मंगलवार सुबह से एबीजी के भुवनेश्वर, मुंबई और दिल्ली के ठिकानों पर छापेमारी की गई।
साथ ही पारिख के सिकंदराबाद स्थित निवास पर भी सीबीआई ने दबिश दी। एबीजी के ठिकानों में मुंबई स्थित हिंडाल्को का कॉरपोरेट आफिस भी शामिल है।
सीबीआई के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक आगे की जांच के सिलसिले में कुमारमंगलम और पारिख को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। छापेमारी के दौरान अहम कागजात बरामद किए गए हैं, जिसकी जांच शुरू की जा चुकी है।
विज्ञापन
नियमों की अनदेखी
एफआईआर के मुताबिक नवंबर, 2005 में ओडिशा के तालावीरा-2 ब्लॉक का आवंटन सरकारी फैसले के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएलसी को किया गया था।
लेकिन 2005 के इस फैसले के बाद कुमारमंगलम और पारिख की एक मुलाकात हुई, जिसके बाद हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को एनएलसी के साथ खदान का साझा ठेका दे दिया गया।
सीबीआई के मुताबिक कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए बनी 25वीं स्क्रीनिंग कमेटी इस फैसले के विरोध में थी। बावजूद इसके यह फैसला लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस जांच में सीबीआई इस सवाल का जवाब ढूंढ़ रही है कि एलएलसी ने कोयला सचिव के इस फैसले का विरोध किया था या नहीं।
जांच इस बात की भी चल रही है कि खुलेआम गलत दिखने वाले इस फैसले का असल कारण क्या था और इसके लिए घूस की रकम दी गई थी या नहीं।
सीबीआई के मुताबिक हालांकि इस ब्लॉक की खुदाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि सरकार को इससे कितना घाटा हुआ है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने 2012 की अपनी रिपोर्ट में कोयला ब्लाकों की नीलामी के बजाए सीधे आवंटित किए जाने के चलते सरकार को 1.86 करोड़ रुपये का घाटे का अनुमान लगाया है।
6 जगह पड़े छापे
सीबीआई ने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर समेत छह जगहों पर छापे मारे। इस दौरान हिंडाल्को के ऑफिस और पूर्व कोल सचिव पारेख के सिकंदराबाद स्थित निवास पर भी छापे मारे गए।
कोल घोटाले में 14वीं एफआईआर
कोयला घोटाले में सीबीआई द्वारा आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम के तहत दर्ज यह 14वीं एफआईआर है।
क्या है मामला
यह मामला ओडिसा के तालाबिरा में 10 नवंबर 2005 को दो कोयला ब्लॉक आवंटित करने में कथित तौर हुई अनियमितता से जुड़ा है। ये ब्लॉक बिजली उत्पादन के लिए आवंटित किए गए थे।
कोल ब्लॉक में हिंडाल्को का नाम शामिल करने के साथ ही बिड़ला का नाम लिया जाने लगा था क्योंकि यह आवंटन सिर्फ सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों के लिए ही था। लेकिन बाद में बिड़ला और पारेख की बैठक के बाद फैसला बदला गया।
इन धाराओं के तहत दर्ज किया गया मामला
सीबीआई ने आईपीसी की धारा 120बी (भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 के साथ) के साथ एफआईआर दर्ज की है। आईपीसी की धारा 120बी आपराधिक साजिश रचने से जुड़ी है।
हिंडाल्को ने दी सफाई
कंपनी ने बांबे स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि हमने कोयला आवंटन के लिए जरूरी हर प्रक्रिया को पूरी तरह से अपनाया है। हमने सरकार द्वारा तैयार किए गए दिशा निर्देशों का पालन किया है।
कुमार मंगलम बिड़ला
कुमार मंगलम बिड़ला 40 अरब डॉलर के आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन हैं। समूह छह महाद्वीपों के 36 देशों में अपना कारोबार करता है। समूह को 50 फीसदी से अधिक राजस्व भारत के बाहर कारोबार से हासिल होता है।
कुमार मंगलम बिड़ला समूह की प्रमुख भारतीय और वैश्विक कंपनियों के बोर्ड के प्रमुख हैं। कुमार मंगलम बिड़ला ने 1995 में 28 साल की उम्र में समूह की कमान संभाली थी। 17 साल का उनका कारोबारी रिकॉर्ड बेहद ही शानदार है।
सबसे अधिक अधिग्रहण
1995 में समूह का टर्नओवर 2 अरब डॉलर था जो वर्तमान में बढ़कर 40 अरब डॉलर का हो गया है।
बिड़ला के नेतृत्व में बीते 17 साल के दौरान समूह ने भारत और वैश्विक स्तर पर 26 अधिग्रहण किए। यह देश में किसी भी भारतीय मल्टीनेशनल कंपनी द्वारा किया गया सबसे अधिक अधिग्रहण है।
कुमार मंगलम बिड़ला का जन्म 14 जून 1967 को कोलकाता में हुआ था। वह मुंबई यूनिवर्सिटी से कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। बिड़ला एक चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं।
उन्होंने लंदन बिजनेस स्कूल से एमबीए भी किया है। आदित्य बिड़ला समूह में वैश्विक स्तर फिलहाल 1,36,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख वैश्विक कंपनियां
नोवेलिस, कोलंबियन केमिकल्स, आदित्य बिड़ला मिनरल्स, आदित्य बिड़ला केमिकल्स, थाई कार्बन ब्लैक, एलेक्जेंडर कार्बन ब्लैक, दोमस्जो फैब्रिकर और टेरेस बे पल्प मिल।
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख भारतीय कंपनियां
हिंडाल्को, ग्रासिम, आदित्य बिड़ला नूवो, अल्ट्राटेक, आइडिया, आदित्य बिड़ला फाइनेंशियल सर्विसेज और आदित्य बिड़ला रिटेल।
इन क्षेत्रों में है कारोबार
एल्युमीनियम, कॉपर, सीमेंट, टेक्सटाइल (पल्प, फाइबर, यार्न, फेब्रिक और ब्रांडेड अपैरल), कार्बन ब्लैक, इंसुलेटर्स, नेचुरल रिर्सोसेज, पावर, एग्री बिजनेस, टेलीकम्युनिकेशंस, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी, रिटेल और ट्रेडिंग
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड
वैश्विक स्तर पर यह एल्युमीनियम और कॉपर सेक्टर की एक प्रमुख कंपनी है। आदित्य बिड़ला समूह की हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड दुनिया की सबसे बड़ी एल्युमीनियम रोलिंग कंपनी है।
इसके साथ ही यह एशिया में प्राइमरी एल्युमीनियम का उत्पादन करने वाली एक सबसे बड़ी कंपनी है। वर्तमान में कंपनी का कारोबार 13 देशों में है और इसका कंसॉलिडेटेड टर्नओवर 14.8 अरब डॉलर का है।
कंपनी की स्थापना 1958 में हुई थी और 1962 में इसके उत्तर प्रदेश के रेनूकुट स्थित एल्युमीनियम संयंत्र से उत्पादन शुरू हुआ। 2007 में नोवेलिस के अधिग्रहण के बाद हिंडाल्को दुनिया की शीर्ष पांच एल्युमीनियम कंपनियों में शामिल हो गई।
कोलगेट टाइमलाइन
जून 1993: केप्टिव कोल माइनिंग के लिए कोल माइन्स (नेशनलाइजेशन) अमेडमेंट एक्ट।
1993 से 2009: केप्टिव इस्तेमाल के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को 210 कोल ब्लॉक आवंटित किए गए।
1 जून, 2012: 2006 से 2009 के बीच कोल ब्लॉक के आवंटन की सीबीआई ने शुरू की प्राथमिक जांच।
17 अगस्त, 2012: कैग ने कहा 2006 से 2011 के बीच बिना आवंटन के 57 कोल ब्लॉक के जरिए कंपनियों को गैर वाजिब फायदा पहुंचाया गया।
27 अगस्त, 2012: पीएम ने संसद में कहा कि 1.86 लाख करोड़ रुपये के घाटे का कैग का आंकड़ा उचित नहीं।
सितंबर, 2012: सीवीसी द्वारा शिकायत आने पर सीबीआई हरकत में आई, छापे और एफआईआर का सिलसिला शुरू।
जून, 2013: जेएसपीएल के चेयरमैन नवीन जिंदल पर एफआईआर, पूर्व कोयला राज्य मंत्री दसारी नारायण राव का भी नाम।
सितंबर, 2013: 1993 से 2009 के बीच कोल ब्लॉक आवंटन पर गायब फाइलों के मामलों में सीबीआई ने शुरू की नए सिरे से जांच।