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कोयले की कालिख में सब के हाथ काले
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 23 Apr 2013 09:37 PM IST
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कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई की जांच में दखल के आरोपों पर पहले से घिरी सरकार की परेशानी कोयला एवं इस्पात संबंधी संसद की स्थाई समिति ने और बढ़ा दी है।
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समिति ने मंगलवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में साल 1993 से साल 2008 तक हुए कोल ब्लॉक के सभी आवंटनों को गैरकानूनी करार दिया है।
समिति ने आवंटन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करते हुए खासतौर पर यूपीए सरकार पर जनता से विश्वासघात करने की कठोर बात कही है।
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साथ ही सरकार पर नियम कायदों को ताक पर रख कर कोल ब्लॉकों के आवंटन का आरोप लगाया है। जिन खदानों में खनन शुरू नहीं हुआ है, उनका आवंटन रद्द करने की सिफारिश करते हुए समिति ने यूपीए ही नहीं बल्कि उसकी पूर्ववर्ती सरकारों को भी कोल ब्लॉक आवंटन के बंदरबांट में शामिल माना है।
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लोकसभा में शोर-शराबे के बीच रिपोर्ट पेश करने के बाद समिति के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि साल 1993 से ले कर अब तक कोल ब्लॉक के एक भी आवंटन में तय मापदंडों और कानून का पालन नहीं किया गया।
साल 1993 से 2004 तक जितने भी आवंटन हुए उनके लिए कोई विज्ञापन जारी नहीं किया गया। साल 2004 के बाद यूपीए सरकार ने भी मनमाने ढंग से सत्ता की शक्ति का गलत इस्तेमाल कर कोल ब्लॉक बांट दिए।
बनर्जी ने कहा कि पूरी की पूरी आवंटन प्रक्रिया ही गैरकानूनी थी। यह जनता के साथ सरकार का बड़ा विश्वासघात है। इसलिए समिति ने आवंटन प्रक्रिया से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में भविष्य में स्पष्ट एवं पारदर्शी आवंटन नीति बनाने की भी सिफारिश की गई है।
समिति की रिपोर्ट से यूपीए सरकार को थोड़ी राहत भी मिली है। दरअसल समिति ने साल 1993 के बाद के सभी आवंटन को गैरकानूनी करार दिया है। इसलिए आवंटन पर सवाल खड़ा करने वाली भाजपा भी सवालों के घेरे में आ गई है।
यही कारण है कि इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कानून मंत्री अश्विनी कुमार के इस्तीफा की मांग करने वाली भाजपा ने समिति की रिपोर्ट पर टिप्पणी से बचने का प्रयास किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने इस बारे में पूछे जाने पर रिपोर्ट के विस्तृत अध्ययन के बाद ही प्रतिक्रिया देने की बात कही।
कालिख के हिस्सेदार
- 1993 से 2010 के बीच विभिन्न सरकारों द्वारा कोल ब्लॉकों का आवंटन किया गया।
- 5 आवंटन: पीवी नरसिंह राव की सरकार ने
- 4 आवंटन: एचडी देवगौड़ा की सरकार ने
- 32 आवंटन: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने
- 175 आवंटन: मनमोहन सिंह की सरकार ने
- कोयला मंत्रालय ने स्थायी समिति को बताया है कि कोल ब्लॉक आवंटन से सरकार को राजस्व की प्राप्ति नहीं हुई लेकिन निजी कंपनियों को जरूर फायदा पहुंचा है। आवंटित किये गए 218 ब्लॉकों में से अभी तक केवल 29 कोयला ब्लॉक को ही विकसित किया गया है।
- इनमें से 16 ब्लॉक निजी कंपनियों के पास है। जबकि 13 पीएसयू को आवंटित किये गए हैं।
-कैप्टिव खनन के लिए अब तक आवंटित 195 कोयला ब्लॉक में से 30 ब्लॉकों ने उत्पादन प्रारंभ किया है।
-2004से 2008 के बीच आवंटित 160 कैप्टिव कोयला ब्लॉकों में से केवल 2 ने उत्पादन आरंभ किया गया है।