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‘दान देने के लिए नहीं है कोयला’

Thu, 19 Sep 2013 01:23 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 Sep 2013 01:23 PM IST
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coal is natural thing it is not for donate
कोलगेट मामले में केंद्र सरकार को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि कोयला बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है और इसे दान के लिए आवंटित नहीं किया जा सकता है।
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कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया कि आखिर किस आधार पर उसने इस संसाधन को निजी कंपनियों को आवंटित किया। जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से उसकी पिक एंड चूज नीति पर भी जवाब मांगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1993 से 2005 के बीच आवंटित हुए 55 कोयला खदानों के आवंटन में अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सरकार से सवाल किए। सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती को सभी सवालों का जवाब कोयला मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक तैयार कर अगली सुनवाई में देने को कहा है।
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पीठ ने सुनवाई को 24 सितंबर तक के लिए टाल दिया है। पीठ ने पूछा कि यदि इन कोल ब्लॉक की पहचान कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) है और केंद्रीय खनन योजना व डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआईएल) को सीआईएल के अधिकार क्षेत्र वाले इलाके के पट्टा हासिल है तो कैसे अन्य कंपनियों के लिए नई जगह बनाकर अधिकार प्रदान किया जा सकता है। पीठ में जस्टिस मदन बी. लोकुर व जस्टिस कुरियन जोसफ भी शामिल थे।

अटॉर्नी ने कहा कि इससे पहले यह मुद्दा नहीं उठा था। वह इसकी पड़ताल करेंगे और अगली सुनवाई में इस बारे में सूचित करेंगे। इस पर पीठ ने कहा कि इस मामले का बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार के स्पष्टीकरण के बगैर इस मामले को आगे नहीं ले जाया जा सकता।

सरकार को हर हाल में स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अदालत इस मसले पर पूरे दिन सुनवाई करने वाली थी। लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने पर सुनवाई को 24 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया।


पीठ ने अटॉर्नी को कोल ब्लॉक की पहचान से जुड़ी सीएमपीडीआईएल की सभी पुस्तिकाएं पेश करने को कहा और यह भी पूछा कि केंद्र की ओर से कंपनियों के आवेदन किस तरह स्वीकार किए गए। इस मसले पर दायर जनहित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई हो रही है, जिसमें सभी कोल ब्लॉक आवंटन को रद्द करने की मांग की गई है।
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