उमर ने मंत्रियों को मोदी दरबार में भेजा
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बाढ़ की विभीषिका में पूरी तरह लाचार और नाकाम रही जम्मू-कश्मीर सरकार अब राज्य के पुनर्वास के लिए केंद्र मुंह ताक रही है। केंद्र सरकार से अधिक से अधिक मदद और सुविधाएं मिल सकें इस खातिर सीएम ने अपने छह मंत्रियों को पीएम मोदी के दरबार भेजा है।
इन मंत्रियों ने पीएम से बाढ़ त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज की गुजारिश की है। मोदी ने इन मंत्रियों को केंद्र की ओर से हर मदद का भरोसा दिलाया है।
राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथेर की अगुवाई में छह मंत्रियों की टीम ने मोदी को मांगों के लंबी फेहरिस्त दी है। त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई है ताकि केंद्र से बिना लालफीताशाही अड़चनों के फंड और वित्तीय संस्थानों से पीड़ित लोगों को कर्ज मिल सके।
मोदी ने दिलाया उमर के मंत्रियों को भरोसा
लेकिन केंद्र की परेशानी है कि किसी भी त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का कोई संवैधानिक या कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसे में मोदी ने इन मंत्रियों को भरोसा दिलाया है कि राज्य की जिंदगी को वापस पटरी पर लाने के लिए केंद्र कोई कसर नहीं छोड़ेगा। मंत्रियों ने यह मांग भी की है कि बाढ़ में मारे गए और घर गंवाने वालों के परिवार को तत्काल पांच लाख रुपए की सहायता दी जाए।
मोदी से मुलाकात के बाद राथेर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भवन निर्माण का खर्च देश भर की तुलना में बहुत ज्यादा है। लिहाजा उन्होंने विशेष पुनर्वास पैकेज की मांग की है। उन्होंने गुजारिश की है कि बीमा कंपनियों को यह निर्देश दिया जाए कि वह बिना किसी झंझट के बीमा धारकों के पैसों का भुगतान कर दें।
राज्य के बाढ़ नियंत्रण मंत्री श्याम लाल शर्मा ने कहा कि वह पीएम की मुलाकात से पूरी तरह संतुष्ट हैं। शर्मा के मुताबिक राज्य में अगले दो साल तक हालात मुश्किल रहने वाले हैं। जल्द ही शुरू होने वाली ठंड लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए पहले ही व्यवस्था करनी होगी। इनका कहना है कि अब तक पीएम की ओर से जिस रकम की घोषणा की गई है वह नाकाफी है।