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मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख निर्मला का निधन

Tue, 23 Jun 2015 01:30 PM IST
Updated Tue, 23 Jun 2015 01:30 PM IST
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CM condols on death of Sister Nirmala

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख सिस्टर निर्मला जोशी का सुबह निधन हो गया। वह 81 साल की थीं। मदर टेरेसा के बाद से ही वह मिशनरीज ऑफ चैरिटी की देखभाल कर रही थीं।

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मिशनरीज ऑफ चैरिटी के अधिकारी के अनुसार सिस्टर निर्मला पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं। उनका पार्थिव शरीर कल सुबह मदर हाउस लाया जाएगा और शाम चार बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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इस अधिकारी के अनुसार जो कोई उनको श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहते है वो मदर हाउस पर उनका दर्शन कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि मदर टेरेसा के निधन के छह महीने पहले 13 मार्च, 1997 को सिस्टर निर्मला को मिशनरीज ऑफ चैरिटी का सुपीरियर जनरल चुना गया था। कोलकाता में अप्रैल, 2009 में हुई जनरल चैप्टर की बैठक में सिस्टर निर्मला के बाद सिस्टर मैरी प्रेमा को सुपीरियर जनरल बनाने का फैसला हुआ था।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिस्टर निर्मला के निधन पर शोक प्रकट किया है। ममता ने एक बयान में कहा, मदर टेरेसा के बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी का नेतृत्व करने वाली सिस्टर निर्मला के निधन से दुखी हूं। कोलकाता और विश्व उनकी कमी महसूस करेगा।

हिंदू-ब्राह्मण परिवार में जन्मी थीं पद्म विभूषण सिस्टर निर्मला

CM condols on death of Sister Nirmala

सिस्टर निर्मला एक नेपाली मूल के हिंदू-ब्राह्मण परिवार में जन्मी थी। उनके पिता भारतीय सेना में अफसर थे।

पटना में ईसाई मिशनरिओं द्वारा उनकी शिक्षा दी गई, लेकिन वे हिन्दू बनी रहीं। अपने 24 वर्ष की आयु तक उन्होंने मदर टेरेसा के काम के बारे में जाना और रोमन कैथोलिक धर्म अपना लिया।

सिस्टर निर्मला ने राजनीतिशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की थी।साथ ही उन्होंने वकालत में खास प्रक्षिक्षण भी लिया था। वे उस मंडली के कुछ पहली सिस्टरों में से थीं जिनको विदेश में मिशन के लिए पनामा भेजा गया था.

1976 में उन्होंने मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी के मननशील शाखा की शुरुआत की तथा उसकी प्रधान बनी रहीं। 1997 में सुपीरिअर जनरल के पद को सम्भालने के लिए चुना गया।

सन् 2009 में भारत सरकार द्वारा सिस्टर निर्मला को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 25 मार्च 2009 को वे अपने पद से सेवानिवृत्त हुई और जर्मन महिला सिस्टर मैरी प्रेमा ने उनका पद सम्भाला।



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