फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

बार-बार मोबाइल पर मैसेज क्यों देख रहे थे अखिलेश?

Sat, 03 Oct 2015 12:08 PM IST
Updated Sat, 03 Oct 2015 12:08 PM IST
विज्ञापन
cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तन से तो आगरा में आयोजित एक सुर-एक ताल कार्यक्रम में मौजूद थे, लेकिन उनका मन कहीं और उलझा हुआ लग रहा था। शायद दादरी की घटना को लेकर तनाव में थे इसीलिए बार बार मोबाइल पर मैसेज चेक किए जा रहे थे। भाषण के बाद मीडियाकर्मियों के नजदीक आए लेकिन सवालों का जवाब दिए बगैर हाथ हिलाते हुए चले गए।

विज्ञापन


13 दिन पहले 19 सितंबर को फुटबाल टीम की जर्सी लांचिंग में भी सीएम शहर में आए थे लेकिन तब और अब में बड़ा अंतर नजर आया। तब चेहरा खिला हुआ था। अब कुछ मुरझाया था। हालांकि बीच बीच में मुस्कुरा रहे थे लेकिन मन की उलझन चेहरे पर आने से रुक नहीं पा रहीं थी। जब बोले तो दादरी की घटना का जिक्र कर ही दिया।
विज्ञापन


अखिलेश ने कहा कि सोशल मीडिया पर दो ही बातों पर बहस हो रही है। एक तो कैमरा किधर होना चाहिए? दूसरा यूपी की एक घटना। उनका इशारा दादरी केस की ओर था। यह शायद उनके मन की उलझन ही थी कि उनकी जुबां से बातें भी कुछ उलझी हुई निकल रहीं थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

स्टेडियम से सीधे खेरिया एयरपोर्ट पहुंचे सीएम

cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

बच्चों के कार्यक्रम में दादरी की घटना का जिक्र करना यह साफ कर गया कि उन्हें टेंशन किस बात की थी? शायद यह भी तनाव का ही असर था कि बराबर में बैठे मंत्री राम सकल गुर्जर का नाम अपने भाषण में लेना ही भूल गए।

11 हजार बच्चे जब एक सुर एक ताल में झूम रहे थे, तो मंच पर बैठे लोगों में भी थिरकन नजर आ रही थी लेकिन सीएम ताली भी बहुत धीरे और बहुत कम बजा पा रहे थे।

उनका कार्यक्रम शहर में दो प्रमुख लोगों के घर जाने का भी था लेकिन गए एक भी जगह नहीं। स्टेडियम से सीधे खेरिया एयरपोर्ट पहुंचे और यहां से लखनऊ के लिए उड़ गए।

‘लैपटॉप पर उंगली उठाने वाले कह रहे डिजिटल इंडिया’

cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

एकलव्य स्टेडियम में आयोजित एक सुर, एक ताल कार्यक्रम का उद्घाटन करने आए मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सियासी बातों से परहेज करने की कोशिश की, लेकिन जब युवा और लैपटॉप का जिक्र चला तो वे मोदी सरकार पर तंज करने से खुद को रोक न सके। उन्होंने कहा कि कल तक जो हमारी लैपटॉप वितरण योजना पर उंगली उठा रहे थे वे आज डिजिटल इंडिया की बात करते हुए देश-विदेश में घूम रहे हैं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि आज हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहे हैं। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा, भाईचारे का संदेश दिया था। इसी के माध्यम से देश की तरक्की हो सकती है। गांधी के इन सिद्धांतों को हिंदुस्तानी ही नहीं पूरी दुनिया याद कर रही है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को साथ लेकर चलना होगा। अपनी संस्कृति, नैतिक मूल्यों को बचाने के साथ पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। नदियों की रक्षा करनी होगी। अखिलेश यादव ने कहा कि पर्यावरण के बारे में ज्यादा नहीं जानता, लेकिन कुछ पढ़ाई मैंने भी की है। समाजवादी सरकार ने नदियों को बचाने काम किया है। युवाओं को आगे लाने विशेषकर कन्याओं के लिए योजनाएं चलाई हैं।

रामसकल का तो नाम तक नहीं लिया

cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

कार्यक्रम स्थल पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच एक सुर, एक ताल कार्यक्रम की चर्चा कम, इस बात अधिक थी कि मुख्यमंत्री ने पार्टी के कई नेताओं को आइना दिखा दिया। अपने भाषण के दौरान मंच पर बैठे सभी मंत्रियों और पदाधिकारियों का नाम लिया, लेकिन राज्यमंत्री रामसकल गुर्जर का नाम नहीं लिया। आमतौर पर कार्यक्रमों के दौरान वे जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष का भी नाम लेते थे, लेकिन इस कार्यक्रम में उनका भी नाम नहीं लिया। सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर मुखातिब भी नहीं हुए।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगरा आगमन के कार्यक्रम के विषय में चर्चा थी कि वे स्टेडियम में कार्यक्रम समापन के बाद डा. आरएस पारीक और शिवदत्त पालीवाल के निवास और खंदारी में एक परिचित के आवास पर जा सकते हैं। सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक ले सकते हैं। माना जा रहा था कि लेकिन अखिलेश यादव कार्यक्रम स्थल से सीधे एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए।

होर्डिंग को लेकर भिड़े सपा कार्यकर्ता

cm akhilesh yadav in tension over dadri violence

प्रताप चौराहा पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में होर्डिंग लगाने पर भिड़ंत हो गई। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक ओर अपने होर्डिंग लगा दिए थे। शहर के बड़े नेताजी के पुत्र वहां पहुंच गए और उस होर्डिंग का विरोध करते हुए अपना होर्डिंग लगाने को जगह बनाने को कहा।

कार्यकर्ताओं ने इनकार किया तो उनमें विवाद होने लगा। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। मामला बिगड़ते देख कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बीच-बचाव किया, लेकिन शहर के बड़े नेताजी के साहबजादे अपना होर्डिंग लगाने में कामयाब हो गए।

शहर के बड़े नेताजी के समर्थकों ने प्रतापपुरा चौराहा पर हंगामा किया तो जिले के बड़े नेताजी के समर्थकों ने खेरिया एयरपोर्ट के गेट पर बवाल काटा। शाम को मुख्यमंत्री के लौटने के दौरान नेताजी के समर्थकों ने अपनी गाड़ी एयरपोर्ट के अंदर ले जाने की कोशिश की तो वहां तैनात एयरफोर्स के जवानों ने निर्धारित संख्या से अधिक जाने वाली गाड़ियों को रोक दिया। इस पर नेताजी के समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया, लेकिन बाद में उन्होंने सुरक्षा कारणों का अहसास हुआ तो शांत रहने में ही भलाई समझी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed