फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   cleanliness campaign is incomplete without good thinking says mira

दिमागी सफाई के बिना अधूरा है स्वच्छता अभियान: मीरा

Mon, 28 Jan 2013 10:19 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Jan 2013 10:19 PM IST
विज्ञापन
cleanliness campaign is incomplete without good thinking says mira
संपूर्ण स्वच्छता अभियान यानि खुले में शौच प्रथा को समाप्त करने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब लोग अपने दिमाग की गंदगी को साफ करेंगे। देश में जातिवादी व्यवस्था के तहत एक जाति विशेष को स्वच्छता की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इससे अन्य सभी लोग यह मानकर यहां-वहां गंदगी करते हैं क्योंकि सफाई करने वाले एक जाति के लोग तो हैं ही। यह बात लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सोमवार को सुलभ इंटरनेशनल सोशल आर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित ‘स्वच्छता का समाज शास्त्र’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कही।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि संसद यदि अपनी जिम्मेदारी उचित तरीके से नहीं निभाएगी तो सड़क  पर जनक्रांतियां होंगी, जिनके रक्तरंजित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि सामाजिक गैर-बराबरी और कुरीतियों को दूर करने के लिए संसद को ही क्रांतियां लाने की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए संसद निर्बाध रूप से चले और कानून बनाने की अपनी जिम्मेदारी निभाता रहे।

विज्ञापन


समाज के जो लोग निचले पायदान पर हैं, उनके लिए संवेदनशीलता से विचार-विमर्श कर उचित हक और सम्मान दिलाने की जिम्मेदारी संसद की है। कुमार ने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान तब तक सफल नहीं होगा, जब तक सभी लोग अपने दिमाग की सफाई नहीं करते। स्पीकर ने खुले में शौच की प्रथा रोकने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डा बिंदेश्वर पाठक और उनके संगठन के महत्वपूर्ण योगदान की इस दौरान सराहना भी की।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि स्वच्छता कार्य के लिए सरकार के पास धन की कमी नहीं है, बस इसकी सफलता के लिए जुनून की जरूरत है। सामाजिक जुनून के जरिए ही देश भर में खुले में शौच की गंभीर समस्या को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साठ फीसदी महिलाएं आज भी खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री भरत सिंह सोलंकी ने कहा कि गंदगी से सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों को उठाना पड़ता है। गंदगी भरे वातावरण में रहने वाले लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं। देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के लिए स्वच्छता का माहौल बनाना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed