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गंगा सफाई पर मोदी से ज्यादा जुनूनी है ये शख्स

Sat, 01 Nov 2014 02:08 PM IST
रोहित घोष/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम
रोहित घोष/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम Updated Sat, 01 Nov 2014 02:08 PM IST
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clean ganga mission of dharam raj dube in kanpur

सूर्योदय हो रहा है। नवंबर का महीना है। गुलाबी सर्दी आ चुकी है। गंगा के ऊपर धुंध धीरे-धीरे छंट रही है। कानपुर में गंगा किनारे गुप्तार घाट के मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया है।

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ठीक सात बजे, सफेद कुर्ता और पायजामा पहने, औसत से थोड़ा कम कद और गठीले शरीर का एक वृद्ध व्यक्ति गुप्तार घाट की सीढ़ियां उतर रहे हैं।

गुप्तार घाट पर लगभग हर कोई 70 साल के धरम राज दुबे को जानता है, और जाने भी क्यों नहीं।

धरम राज दूबे पेशे से वकील हैं और पिछले 34 साल से अपनी निजी नाव में सवार होकर, कई घंटे उसे खेकर, कई किलोमीटर दूर गंगा के एक ऐसे तट पर जाते हैं जहां पानी साफ हो और वो नहा सकें।

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'1970 से गंगा में ही करता हूं स्नान'

clean ganga mission of dharam raj dube in kanpur

दूबे कहते हैं, "1970 के आस-पास मैं कानपुर आया और गंगा में नहाना शुरू किया, और तब से गंगा में नहाने की मेरी आदत पड़ गयी। गंगा स्नान मेरी दिनचर्या में शामिल हो गया है।"

घाट पर दूबे कुर्ता पायजामा उतारकर एक केसरिया रंग की धोती पहनते हैं और अपनी नाव में सवार हो जाते हैं।

वे कहते हैं, "जब कानपुर की तरफ से बहने वाला पानी गंदा होने लगा, तब मैंने नाव लेकर गंगा की दूसरी तरफ जाना शुरू कर दिया। 1980 में 13000 रुपए में मैंने अपनी नाव खरीद ली। तब से लेकर आज तक अगर मैं कानपुर शहर में हूं तो गंगा में ही नहाता हूं, चाहे बरसात में गंगा में सैलाब आया हो या फिर सर्दियों में गंगा पूरी तरह से कोहरे से ढकी हो। मैं सुबह 7 से 10 बजे तक गंगा मैय्या की गोद में रहता हूं।"

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गंगा की सफाई और आम लोग

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गुप्तार घाट लौटते समय दूबे गंगा में बह रहे कचरे जैसे फूल, नारियल, प्लास्टिक की थैलियां अपनी नाव में जमा कर लेते हैं। गुप्तार घाट पहुंच कर वे कचरा एक निश्चित स्थान पर डाल देते हैं जहां से सफाईकर्मी उसे उठा लेते हैं।

दूबे कहते हैं, "मैं एक एकांत जगह पर जाकर गंगा में नहाता और पूजा करता हूं। लौटते समय गंगा में से कचरा उठा लेता हूं। वह क्रम आज भी चल रहा है।"

वो कहते हैं, "कुछ साल पहले मैं गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री भी गया था। पर जो आनंद कानपुर में मिलता है वह मुझे गंगोत्री में नहीं मिला।"

दूबे का कहना है कि गंगा की सफाई के लिए आम आदमी को जागरूक होना होगा। वो कहते हैं, "बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाएं तो एकतरफ हैं, अगर आम आदमी गंगा की सफाई पर थोड़ा ध्यान दे तो बड़ा बदलाव आ सकता है।"

लोग गंगा में कचरा न डालकर, गंगा किनारे शौच न कर और नहाते समय साबुन का इस्तेमाल न कर गंगा को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

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