जैश ए मोहम्मद पर शिकंजा कसे बिना नहीं बनेगी बात
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भारत-पाकिस्तान के बीच भले ही आम सहमति से विदेश सचिव स्तर की वार्ता टल गई हो, मगर इसकी नई तिथि तय किया जाना आसान नहीं होगा। भारत चाहता है कि नई तारीख तय करने से पहले पाकिस्तान पठानकोट हमले को अंजाम कदने वाले आतंकी संगठन पर पूरी ताकत से शिंकजा कसे।
मुंबई आतंकी मामले की जांच की हश्र का गवाह भारत पठानकोट मामले की जांच का भी किसी भी कीमत पर वैसा ही हश्र होने देना नहीं चाहता। यही कारण है कि भारत ने इस पर पाकिस्तान की ओर से इस हमले की जांच के लिए संयुक्त जांच दल (जेआईटी) भेजे जाने का न केवल स्वागत किया है, बल्कि उसे दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत भी उपलब्ध कराने का मन बनाया है।
भारत अंतर्राष्ट्रीय दबाव में उलझे पाकिस्तान को इस हमला मामले की जांच से पीछे हटने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई से बचने का एक भी बहाना देना नहीं चाहता। इसी रणनीति के तहत भारत ने अब तक की जांच का स्वागत करते हुए भावी कार्रवाई पर पैनी निगाह रखने की बात कही है।
पाक के पलटी मारने पर सतर्क है भारत
सरकारी सूत्र ने
बताया कि पठानकोट आतंकी हमले के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर और राष्ट्रीय
सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल लगातार अपने-अपने पाकिस्तानी समकक्ष के
संपर्क में रहे।
जेआईटी की ओर से बुधवार को जैश ए मोहम्मद के खिलाफ की गई
कार्रवाई के बाद जयशंकर ओर डोभाल दोनों ने अपने अपने समकक्षों के समक्ष
कार्रवाई का दायरा बढ़ाने और दोषियों में शरामल बड़े नामों पर शिकंजा कसने
की मांग की।
उक्त सूत्र के अनुसार चूंकि पाकिस्तान ने शुरू में मुंबई हमला
मामले में भी इसी तरह की सक्रियता दिखाने के बाद पलटी मार दी थी, इसलिए
भारत वार्ता की राह में आगे बढ़ने से पहले पाकिस्तान के भावी रुख की गहन
पड़ताल कर लेना चाहता है।
भारत की निगाहें मौलाना मसूर अजहर पर
भारत की निगाहें मुख्य रूप से जैश के मुखिया
मौलाना मसूर अजहर पर है। भारत चाहता है कि पाकिस्तान अपनी कार्रवाई के जरिए
अजहर के मामले में किसी भी तरह की रियायत न बरते जाने का पुख्ता भरोसा दे।
अविश्वास का एक बड़ा कारण लश्कर ए तयबा और जैश ए मोहम्मद का उस पंजाब में
दबदबा होना है जहां कि सत्तारूढ़ मुस्लिम लीग (एन) का भी व्यापक आधार है।
कूटनीतिक रणनीतिकार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि क्या पाकिस्तान के
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ वाकई इन संगठनों के खिलाफ शीर्ष स्तर पर कार्रवाई
का खतरा मोल लेंगे?