'क्राइम केस' पर चीफ जस्टिस का बड़ा बयान
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भारत के प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू ने कहा है कि आपराधिक मामले का ट्रायल खत्म होने की अधिकतम समय सीमा पांच वर्ष होनी चाहिए।
हालांकि प्रधान न्यायाधीश ने यह स्वीकार किया कि भारत में न्यायपालिका के समक्ष आधारभूत सुविधाओं की कमी और आबादी के हिसाब से न्यायाधीशों की संख्या कम होने जैसी परेशानी है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के संयुक्त सम्मेलन के बाद चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने कहा कि हम लोगों ने निर्णय लिया है कि कोशिश यह रहेगी कि आपराधिक मामलों का ट्रायल पांच वर्ष में पूरा हो जाए। हालांकि मेरी प्राथमिकता है कि ट्रायल दो वर्ष तक पूरा हो जाना चाहिए। लेकिन हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि आधारभूत सुविधाओं की कमी और आबादी के हिसाब से कम संख्या में न्यायाधीशों के होने जैसी समस्याएं भी हैं।
मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों का संयुक्त सम्मेलन
जस्टिस दत्तू ने न्यायिक सेवा आयोग से जुड़े मसले पर गौर करने के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति के गठन का निर्णय लिया है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि ऊपरी न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक समान नीति हो।
निर्भया मामले की सुनवाई में देरी पर सवाल पूछे जाने पर जस्टिस दत्तू ने कहा कि इसकी अपील गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आई है। सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही मृत्युदंड के 23 मामले लंबित हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि अगर इस मामले का अदालत केसमक्ष उल्लेख किया जाएगा तो निश्चिय ही इस मामले को प्राथमिकता दी जाएगी।
वहीं पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा के अदालतों के 365 दिन खुले होने के प्रस्ताव पर जस्टिस दत्तू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट 190 दिन काम करता है। लेकिन लोगों को यह नहीं पता है कि जज हर रोज काम करते है। बाकी बचे समय में जज फैसले लिखते हैं। 20 वर्ष के तर्जुबे के आधार पर मैं कह सकता है कि हम हफ्ते के सातों दिन काम करते हैं।