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भारत के नागरिकों को मिलेगा अलग पहचान पत्र

Wed, 09 Jul 2014 10:36 AM IST
Updated Wed, 09 Jul 2014 10:36 AM IST
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citizenship identity card will give to every indian

सरकार देश के सभी मूल नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र देगी। इसके लिए तय समय सीमा में एक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनाया जा रहा है। इस रजिस्ट्रार में भारत के मूल नागरिकों का नाम शामिल किया जाएगा।

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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में करोड़ों की संख्या में रह रहे अवैध घुसपैठियों और प्रवासियों पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अब मूल नागरिक और नकली नागरिकों की पहचान का वक्त आ गया है।
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उन्होंने सदन को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित घटकों के साथ बैठक कर इस संबंध में कई अहम फैसले लिए हैं।

इसके तहत विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर योजना को मिलाकर एनपीआर डेटा बेस बनाने पर जोर दिया गया है। इसकी मदद से सभी मूल नागरिकों की पहचान कर उन्हें एनपीआर सूची में डाला जाएगा।
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यह योजना तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। इसमें आधार कार्ड धारकों की तस्दीक नए पैमाने के तहत की जाएगी। एनडीए सरकार का मानना है कि हर आधार कार्ड धारक भारत का मूल नागरिक हो यह जरूरी नहीं है।

आधार कार्ड मूल नागरिकता की गारंटी नहीं

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गौरतलब है कि भारत में लंबे समय से रह रहा बांग्लादेशी राशन कार्ड और दूसरे दस्तावेजों के जरिए आधार कार्ड हासिल कर सकता है। लिहाजा आधार मूल नागरिकता की गारंटी नहीं दे सकता।

राजनाथ ने कहा कि अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर बांग्लादेशियों के पलायन के संदर्भ में गृहमंत्री ने सीमा पर फेंसिंग के कामों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि एनपीए सूची तैयार कर अवैध घुसपैठियों की पहचान को मूल नागरिकों से अलग रखा जा सकता है। गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि नागरिकों को राष्ट्रीय परिचय पत्र मुहैया कराना कानूनी तौर पर जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2003 में ही नागरिकता कानून में संशोधन कर उसमें अनुच्छेद 14 ए जोड़ा था। इस संशोधन के मुताबिक भारत के हरेक नागरिक को राष्ट्रीय पहचान पत्र देना सरकार की जिम्मेदारी है।

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