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महाकुंभ: हालात अब भी बेकाबू, फंसे हैं लाखों श्रद्धालु

Tue, 12 Feb 2013 12:22 AM IST
इलाहाबाद/रणविजय सिंह
इलाहाबाद/रणविजय सिंह Updated Tue, 12 Feb 2013 12:22 AM IST
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circumstances still uncontrollable in mahakumbh

महाकुंभ की भीड़ के नियंत्रण में बरती गई लापरवाही ने रविवार को इलाहाबाद जंक्शन पर 37 श्रद्धालुओं की जान ले ली। 39 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। भगदड़ में लापरवाही ने अहम भूमिका निभाई। वैसे हादसे के बाद प्लेटफार्म पर तैनात कुछ सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को काबू न किया होता तो मरने वालों की संख्या सैकड़ों में हो सकती थी।

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प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्नान के बाद करोड़ों की भीड़ स्टेशन की तरफ धकेल दी गई, लेकिन मेला प्रशासन, जिला प्रशासन और रेलवे प्रशासन के एक बार भी इस मसले पर बातचीत करने की जरूरत नहीं समझी। किसी ने यह नहीं सोचा कि इस भीड़ को कैसे अलग-अलग रूटों से भेजा जाए।
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हालात का जायजा लेने सोमवार को इलाहाबाद पहुंचे रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने स्वीकार किया कि करोड़ों की भीड़ के हिसाब से तैयारियां नाकाफी थीं। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर जिम्मेदारी नहीं डाली। स्टेशन पर भगदड़ के बाद हर ओर कोहराम मच गया। जिसे जिधर जगह मिली, भाग निकला।
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इस भागमभाग में हजारों लोग अपने से बिछड़ गए। जो श्रद्धालु किसी तरह ट्रेनों में सवार हो गए वे भी परेशान हैं। रविवार रात से सैकड़ों ट्रेनें रास्ते में अटकी हैं और लाखों श्रद्धालु रास्ते में फंसे हैं। आलम यह है कि पांच-छह घंटे की दूरी ट्रेनें सोमवार शाम तक तय नहीं कर पाई थीं।

हादसे के बाद अब कोई भी अफसर अथवा विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। दरअसल, जंक्शन पर दोपहर से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। इस बीच, उन्हें जानकारी देने वाला सूचना तंत्र फेल हो गया। मेला क्षेत्र में भी भीड़ के निकलने की जानकारी देने के लिए लगाया गया सूचना तंत्र काम नहीं कर रहा था।

वैसे रेलवे ने दावा किया था कि सिविल लाइंस सरकुलेटिंग एरिया से मेले की भीड़ को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, लेकिन दो दिनों से इसका उलटा चल रहा था। सिटी साइड में जुटा रेलवे का अमला कुछ समझता, इससे पहले ही नवाब यूसुफ रोड से होते हुए पहुंची भीड़ से जंक्शन के सभी प्लेटफार्म, फुटओवर ब्रिज ठसाठस भर गए। आलम यह रहा कि प्लेटफार्म पर जगह न मिलने पर यात्री पटरियों के बीच बैठ गए और अधिकारी मूकदर्शक बने देखते रहे।


बहरहाल, रेलवे सूत्रों ने भी दावा किया है कि जिला प्रशासन, रेलवे और पुलिस प्रशासन में सूचनाओं के आदान-प्रदान की कमी ने हादसे को जन्म दिया। भीड़ को तेजी से निकालने में रेलवे भी नाकाम रहा। घटना के बाद डीआरएम हरींद्र राव ने माना था कि उन्होंने शाम पांच बजे जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और मेला प्रशासन को जंक्शन पर ज्यादा भीड़ जुटने की जानकारी दी थी और स्टेशन के बाहर भीड़ नियंत्रित करने का आग्रह किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। डीआरएम का यह बयान लापरवाही और अनदेखी की स्थिति को बखूबी बयां करता है।

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