सोनिया को CIC का नोटिस, मुश्किल में कांग्रेस
लोकसभा चुनावों और कई राज्यों में करारी हार के बाद अब तक के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस को एक और झटका मिला है। केंद्रीय सूचना आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस भेजा है। आयोग यह नोटिस उन्हें एक आरटीआई याचिका का जवाब न देने पर भेजा है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने सोनिया गांधी को नोटिस भेजते हुए पूछा है कि उनकी पार्टी ने अभी तक आरटीआई का जवाब देने के लिए किसी पैनल का गठन क्यों नहीं किया है?
बोर्ड ने नोटिस के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष को आरटीआई के तहत पार्टी के बारे में सूचना देने के लिए कोई व्यवस्था न करने के लिए कारण बताने को कहा है। गौरतलब है कि आयोग ने जिस आरटीआई के लिए नोटिस भेजा वह एक साल पुराना है और अभी तक उसका जवाब नहीं दिया गया।
किसने लगाई थी आरटीआई?
रिपोर्ट के अनुसार, प्रख्यात आरटीआई कार्यकर्ता आरके जैन ने पिछले साल फरवरी में कांग्रेस को आवेदन भेजकर सूचना मांगी थी लेकिन कांग्रेस ने जैन के आवेदन का जवाब नहीं दिया था।
इसके बाद आरके जैन ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) से शिकायत कर सूचना पाने की गुहार लगाई थी। लेकिन सीआईसी से भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो वे दिल्ली उच्च न्यायालय में सीआईसी से सूचना दिलाने के लिए अर्जी दाखिल की थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जैन की अर्जी सुनते हुए सीआईसी को छह महीने के भीतर जैन की आरटीआई पर जवाब दिलाने का आदेश दिया था। जिसके बाद सीआईसी ने न्यायालय के आदेश का हवाला देकर कांग्रेस को सूचना देने के लिए कहा था।
वहीं आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल की ओर भाजपा पर लगाई गई एक आरटीआई पर सीआईसी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को भी नोटिस भेजा है। जबकि इस मामले पर कुछ पार्टियों को अभी नोटिस भेजना बाकी है।
इन राष्ट्रीय पार्टियों को देना पड़ेगा जवाब
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सीआईसी के एक बोर्ड ने देश की इन राष्ट्रीय पार्टियों, कांग्रेस, भाजपा, सीपीआई, सीपीआई-एम, एनसीपी और बसपा को पब्लिक अथॉरिटी मानते हुए आरटीआई के तहत जवाबदेह माना था।
सीआईसी ने इन सभी पार्टियों को आरटीआई के तहत सूचना देने के लिए एक पैनल या व्यवस्था तैयार करने के लिए कहा था लेकिन अभी तक किसी पार्टी ने सीआईसी के आदेश का पालन नहीं किया।
कांग्रेस और भाजपा के बाद सीआईसी अन्य पार्टियों को भी जल्द नोटिस भेज सकता है।
गौरतलब है कि आरके जैन ने सरकारी पैसे से पार्टी विशेष के नेताओं का प्रचार करना और विज्ञापनों मे नेताओं की तस्वीरे छापकर जनता का पैसे का दुर्पयोग करने को लेकर सूचना मांगी थी।