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त्यागी तो सिर्फ मोहरा, कई और चेहरों से नकाब उठना बाकी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 15 Feb 2013 11:03 PM IST
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भले ही पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी पर सभी की भौंहें तन गई हैं, लेकिन इस खेल के पीछे और भी बड़े खिलाड़ी हो सकते हैं, जिनका खुलासा होना बाकी है। किसी भी सेना प्रमुख के पास इतनी शक्ति नहीं होती कि वह अकेले कोई रक्षा सौदा पास करवा ले। यह एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है।
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रक्षा सौदा प्रक्रिया
- कोई भी बड़ा रक्षा सौदा सिर्फ सेना मुख्यालय से ही पास नहीं होता है।
- सौदे को आगे बढ़ने की मंजूरी रक्षा मंत्रालय देता है।
- इसके बाद सेना मुख्यालय तकनीकी शर्तें तैयार कर मंत्रालय को भेजता है।
- इसमे भावी खरीद की अहम विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख होता है।
- इन विशेषताओं के आधार पर सेनाएं रक्षा मंत्रालय से सौदों की सिफारिश करती हैं।
- रक्षा मंत्रालय द्वारा मंजूरी के बाद सेना मुख्यालय द्वारा टेंडर जारी किए जाते हैं।
- टेंडर के आधार पर ही हथियार कंपनियां अपने हथियारों का परीक्षण करवाती हैं।
- परीक्षण के लिए सैन्य मुख्यालय अपने विशेषज्ञों की टीम तैनात करता है।
- सभी हथियारों या उपकरणों की ट्रायल रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को भेजी जाती है।
- रक्षा मंत्रालय बाद में टेंडर में शामिल कंपनियों से सौदेबाजी करता है।
- इसके लिए रक्षा मंत्रालय एक कॉस्ट निगोशिएसन कमेटी (सीएनसी) गठित करता है।
- यह कमेटी होड़ में शामिल कंपनियों के प्रस्तावों का तुलनात्मक आकलन करती है।
- आकलन के आधार पर पहले और दूसरे नंबर पर आने वाली कंपनी से गहन सौदेबाजी होती है।
- सबसे कम कीमत वाली कंपनी के साथ अंतिम तौर पर समझौता किया जाता है।
- सीएनसी की सिफारिश पर पहले रक्षा मंत्रालय विचार करता है।
- इसके बाद रक्षा मंत्री द्वारा सुरक्षा मामलों की समिति के पास सिफारिश भेजी जाती है।
- समिति की मंजूरी के बाद ही किसी सौदे को अमली जामा पहनाने का अंतिम फैसला किया जाता है।
देश के रक्षा क्षेत्र में फेनमेकानिका समूह की मौजूदगी
भारतीय रक्षा सौदों में फेनमेकानिका का वर्चस्व पिछले 30 दशक से भी ज्यादा से है। इस समूह की विभिन्न कंपनियों समय-समय पर भारत में कई रक्षा सौदे किए।
1971 - अगस्ता वेस्टलैंड ने नौसेना को 41 सी किंग हेलीकॉप्टर सप्लाई किए।
1980- नौसेना के लिए ‘सेलेक्स ईएस’ ने कॉम्बैक्ट मैनेजमेंट सिस्टम और ‘वॉस’ ने टॉरपीडो सप्लाई किए।
1991- ओटो मेलारा ने नौसेना को 31 नेवल गन बेची।
1998- सेलेक्स ईएक्स ने नौसेना के लिए संचार सिस्टम मुहैया कराया।
2001- सेलेक्स ने एचएएल और बीईएल के साथ मिलकर नौसेना और वायुसेना के लिए रडार सिस्टम तैयार किया।
2005- वॉस और सेलेक्स के साथ सबसोनिक ड्रोन सिस्टम के लिए करार हुआ।
2010- अगस्ता वैस्टलैंड ने 12 एडब्ल्यू 101 वीवीआई हेलिकॉप्टरों की सप्लाई का टेंडर हासिल किया।
2011- सेलेक्स ईएस ने नौसेना के लिए हवाई सर्विलांस रडार का टेंडर हासिल किया।
विवादों की उड़ान
फरवरी 2010 - 12 हेलिकॉप्टरों के लिए करार हुआ।
फरवरी 2012 - सौदे में घूसखोरी का मामला मीडिया में छाया। रक्षा मंत्रालय ने रोम स्थित भारतीय दूतावास से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी।
मई 2012 - दूतावास ने जानकारी दी कि इटली के न्याय विभाग से यह जानकारी मांगी जा सकती है।
जुलाई 2012- भारत सरकार ने रिपोर्ट के लिए औपचारिक पत्र लिखा।
नवंबर 2012 - आयकर विभाग ने रक्षा मंत्रालय को इस सौदे में बिचौलिए की भूमिका को लेकर अलर्ट किया।
दिसंबर 2012- भाजपा सांसद प्रकाश जावडेकर ने राज्यसभा में मामला उठाया। रक्षा मंत्री एके एंटनी को पत्र लिखकर जांच की बात कही। मगर रक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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फरवरी 2013 - फिनमेकानिका के सीईओ ग्यूसेप्पे ओरसी को भारतीय मिडिलमैन को रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।