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हेलीकॉप्टर सौदे में पीएम ऑफिस की तरफ उठी अंगुली

Wed, 13 Feb 2013 10:58 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 13 Feb 2013 10:58 PM IST
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chopper deal finger pointed towards prime minister office

पूर्व एयर चीफ मार्शल एस कृष्णास्वामी हेलीकॉप्टर खरीद में घूस के मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ इशारे किए हैं। उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि जिन हेलीकॉप्टरों पर विवाद है वे वीवीआईपी लोगों के लिए खरीदे गए थे न कि सुरक्षा के उद्देश्य से। इन्हें खरीदने की पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय और स्पेशल प्रेटोक्शन ग्रुप की देखरेख में हुई थी।

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उन्होंने साफ कहा कि यह रक्षा नहीं बल्कि वीआईपी सौदा था। इसके लिए वीआईपी लोगों से जवाब तलब होना चाहिए। वही इसके जिम्मेदार हैं। वायुसेना इस मामले में सिर्फ तकनीकी पक्ष को देखने-परखने में शामिल थी। उन्होंने कहा कि वीआईपी वायुयानों और हेलीकाप्टरों की खरीद वीआईपी लोग खुद ही देखते हैं। मेरे अनुसार इस हेलीकॉप्टर की खरीद प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां थीं। वर्ना इस तरह के आरोप सामने नहीं आते।
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सीबीआई को नहीं मिले पर्याप्त दस्तावेज
रक्षा मंत्रालय ने 3600 करोड़ रुपये की हेलीकॉप्टर डील के मामले में सीबीआई को जांच करने का आदेश जारी कर दिया है। एजेंसी को मंत्रालय का यह आदेश और मामले से संबंधित दस्तावेज भी मिल गए हैं। लेकिन सीबीआई के सूत्रों की मानें तो एजेंसी को जांच के लिए पर्याप्त दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए हैं। सीबीआई का दावा है कि शुरुआती जांच के बाद इस पूरे मामले पर एजेंसी जल्द मुकदमा दायर करेगी।
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सीबीआई सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय की ओर से एजेंसी को पूरे मामले पर तेजी से जांच करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन डील से संबंधित दस्तावेजों के नाम पर इटली के कोर्ट में हुई कार्यवाही से जुड़े कागजात, मीडिया रिपोर्ट, चैनलों की वीडियो क्लीपिंग ही सौंपी गई है।

हालांकि एजेंसी का दावा है कि वह शुरुआती जांच के दौरान मंत्रालय की ओर से सौंपे दस्तावेजों के अलावा अपनी ओर से भी साक्ष्य जुटाएगी। इसके बाद ही इस मामले में एजेंसी की ओर से मुकदमा दायर किया जाएगा।

इध्ार, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में घूस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बावजूद देश में सियासी तूफान तेज हो गया है। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एयर मार्शल एसपी त्यागी पर इस सौदे में रिश्वत लेने का संगीन आरोप सामने आने के बाद सरकार ही नहीं शीर्ष रक्षा और सैन्य महकमे के लिए इस राजनीतिक तूफान को थामना मुश्किल हो गया है।

त्यागी पर लगे गंभीर आरोपों को हथियार बनाते हुए विपक्ष ने यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर सीधा हमला बोल दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने हेलीकाप्टर सौदे को दूसरा बोफोर्स कांड बताते हुए सरकार से इसमें करीब चार सौ करोड़ रुपए की दलाली खाने वालों के नाम का खुलासा करने की मांग कर दी है।

वहीं माकापा ने भी हमलावर रुख अपनाते हुए कहा है कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में की जानी चाहिए। यूपीए पर गहराते दबाव को देखते हुए सरकार ने घूसखोरी साबित होने पर इस डील को रद्द करने की घोषणा कर दी है।

रक्षामंत्री एके एंटनी ने एसपी त्यागी के हेलीकाप्टर सौदे में रिश्वत लेने की बात इटली की अदालत में चल रहे मुकदमे में सामने आने से मचे हड़कंप के बाद कहा कि सीबीआई जांच में घूसखोरी साबित होने पर डील रद्द होगी।

इस डील में रिश्वत देने के आरोपों में गिरफ्तार फिनमैकानिका कंपनी के सीईओ गियूसेप्पे ओरसी पर इटली की अदालत में दाखिल आरोपों में एयर चीफ मार्शल त्यागी का नाम सामने आया है। यह मामला इसीलिए भी बेहद गंभीर और संगीन है कि पहली बार सीधे-सीधे किसी सैन्य प्रमुख पर रक्षा सौदे में दलाली का आरोप लगा है।

इटली की अदालत में मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि वेस्टलैंड हेलीकाप्टर बेचने के लिए फिनमैकानिका ने कुल सौदे का दस फीसदी रिश्वत दिया। रिश्वत लेने वालों में त्यागी के नाम का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि इसकी एवज में टेंडर नियम प्रक्रिया में बदलाव किया गया।

इसके तहत 18000 फीट की उंचाई तक उड़ान भरने की शर्त को घटाकर 15000 फीट किया गया। ताकि वेस्टलैंड हेलीकाप्टर इस डील के टेंडर में शामिल हो सके। इस डील में पूर्व वायुसेना प्रमुख के तीन करीबी रिश्तेदारों जूली त्यागी, डॉकसा त्यागी और संदीप त्यागी के बिचौलिए की भूमिका निभाने की बात भी सामने आई है। कहा गया है कि इसके लिए ओरसी ने एक अमेरिका में जन्मे गुइडो राल्फ हैश नाम के दलाल की सेवाएं ली और इनके जरिए त्यागी के रिश्तेदारों को रिश्वत की रकम दी गई।

पूर्व वायुसेना प्रमुख ने अपने ऊपर लगे इस बेहद गंभीर आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि दलाली लेने की बात गलत है और वे इस संगीन आरोप से हैरान हैं। मगर उन्होंने यह स्वीकार किया कि जो तीन नाम सामने आए हैं वे उनके रिश्तेदार हैं।


2004 से 2007 तक वायुसेना प्रमुख रहे त्यागी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने आरोपों में घिरे अपने रिश्तेदारों से भी बात की है और उनका कहना है कि इस डील में उन लोगों की कोई भूमिका नहीं है। त्यागी ने कहा कि वह सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं।

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