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राष्ट्रीय एकता के प्रतीक पटेल की चीन में बन रही मूर्ति

Sat, 12 Sep 2015 05:44 PM IST
Updated Sat, 12 Sep 2015 05:44 PM IST
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Chinese firm is creating dummy statue of sardar patel

देश की एकता कीअविस्मरणीय मिसाल के तौर पर गुजरात में स्थापित होने वाली विश्व प्रसिद्ध सरदार बल्लभभाई पटेल की मूर्ति चीन में बन रही है।

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बताया जा रहा है कि देश के जाने-माने मूर्तिकार राम सुतार और अनिल सुतार दो दिन पहले ही चीन में बन रही पटेल की मूर्ति के कामकाज का मुआयना कर लौटे हैं। इस मामले में उनके दोबारा से चीन जाने के आसार है। हालांकि अमर उजाला से बातचीत में सुतार ने कहा है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वे निजी काम से चीन गए थे।
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मगर लारसन एंड टरबों के सूत्रों की मानें तो कंपनी ने मूर्ति बनाने का जिम्मा चीन को ढाई महीने पहले ही सौंप दिया है। इस मामले में गोपनीयता बरती जा रही है।
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चीन की कंपनी को एडवांस राशि भी दे दी गई है और चीन में मूर्ति बनाने का कामकाज शुरू हो गया है। प्रतीक के रूप में थरमोकोल से बनी मूर्ति की लगभग 50 फीट का हिस्सा बन चुका है। इतनी बड़ी मूर्ति को चीन से लाने में मुश्किल होगी।

इसलिए 3-3 फीट के पीस में कांसे से बनने वाली मूर्ति के अंगों को ढाला जा रहा है। यहां आने के बाद सभी भागों को जोड़ मूर्ति को पूर्ण स्वरुप दिया जाएगा। 

लागत घटाने के ‌लिए चीनी कंपनी का लिया सहारा

Chinese firm is creating dummy statue of sardar patel

सूत्रों के अनुसार इस मामले में लारसन एंड टरबो के अधिकारियों की चीन के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक ढाई माह पूर्व चेन्नई में हुई थी। जिसमें चीन की कंपनी को पटेल की कांसे की मूर्ति बनाने के प्रस्ताव को हस्तांतरित कर दिया गया और मूर्ति को डिजाइन करने वाले सुतार से कंपनी की ओर से कहा गया है कि वे कामकाज की देख-रेख के लिए चीन जाने को तैयार रहें।

इसके बाद चीन की कंपनी के अधिकारियों ने सुतार के साहिबाबाद स्थित फैक्ट्री पर आकर उनसे मूर्ति की 3डी इमेज हासिल कर ली।

अमर उजाला से बातचीत में खुद अनील सुतार ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 30 फीट की सरदार पटेल की मूर्ति का निर्माण किया है जिसका काम पूरा हो गया है। जबकि उनके वेबसाइट पर लिखा है कि वे 522 फीट की मूर्ति बना रहे हैं। हालांकि मूर्ति के हाथ को लेकर उठ रहे विवाद पर सुतार ने कहा है कि समस्या हल हो गई है।

सरदार पटेल ट्रस्ट ने बीते अक्टूबर में इस विश्व प्रसिद्ध माने-जाने वाली मूर्ति के निर्माण का जिम्मा देश की नामी-गिरामी कंपनी लारसन एंड टरबो को 2989 करोड़ में दिया था। उस वक्त भी कंपनी के चेयरमैन ने कहा था कि वे मूर्ति बनाने के लिए चीन की कंपनियों से बात कर रहे हैं। माना जा रहा कि लागत कम करने के लिए भारतीय राष्ट्रवाद के इस प्रतीक की मूर्ति का ढांचा चीन में बनाया जा रहा है।

2014 लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद करने के मकसद से पीएम मोदी ने पटेल की विश्व विख्यात मूर्ति बनवाने का ताना-बाना बूना था। इसके लिए अभियान चलाकर देश के गांव-गांव से भाजपा ने लोगों से लोहा इकट्ठा किया था।  

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