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घुसपैठ पर चीन का पहली बार बड़ा बयान

Fri, 01 Aug 2014 01:45 PM IST
Updated Fri, 01 Aug 2014 01:45 PM IST
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Chinese army admits incursion at Depsang Valley in 2013

चीनी सेना ने पहली बार पिछले साल देपसांग घाटी में घुसपैठ की बात स्वीकार की है।

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पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने यह भी कहा है कि इस तरह की घटना इसलिए हुई क्योंकि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) को लेकर अलग अलग धारणाएं हैं।

चीनी राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल गेंग यानशेंग ने कहा है कि ‘पिछले साल सीमा क्षेत्र में कुछ घटनाएं हुईं, सभी का बातचीत के जरिए उचित हल निकाल लिया गया’।

देपसांग घाटी में घुसपैठ की घटना

Chinese army admits incursion at Depsang Valley in 2013
हालांकि प्रवक्ता ने देपसांग घाटी में घुसपैठ की घटना का जिक्र अलग से नहीं किया। अप्रैल 2013 में चीनी सैनिक देपसांग घाटी में घुस आए थे और वहां अपने तंबू गाड़ दिए थे।

एक पत्रकार वार्ता में सवाल का जवाब देते हुए प्रवक्ता ने कहा, ‘सीमा रेखा चिन्हित नहीं है, इसको लेकर दोनों देशों की अलग अलग धारणाएं हैं।’ इस पत्रकार वार्ता में पहली बार विदेशी मीडिया ने भी हिस्सा लिया।


चीनी सेना के इतिहास में पहली बार विदेशी मीडिया को पत्रकार वार्ता में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया। यह सवाल भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई ने उठाया।
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दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ा

Chinese army admits incursion at Depsang Valley in 2013

गेंग ने कहा, ‘विदेशी मीडिया को पत्रकार वार्ता में इसलिए आमंत्रित किया गया क्योंकि इससे चीन और चीनी सेना के संबंध बेहतर समझ बनेगी।
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पिछले साल देपसांग घाटी में घुसपैठ की घटना चीनी पीएम ली केचियांग की भारत यात्रा से पहले हुई थी, इससे दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

बाद में कई राउंड की वार्ता के बाद इसका हल निकला था, चीनी सैनिक तंबू उखाड़कर वापस अपनी सीमा में चले गए थे। चीन और भारत की करीब 4000 किलोमीटर लंबी सीमा आपस में लगी है।

चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा करता है।

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