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चीन के इस काम से हिंदुस्तानी होंगे खुश!
नई दिल्ली/ इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 28 May 2013 03:29 PM IST
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चीन की सरकार अब तक अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी के नाम पर नाक-भौं सिकोड़ती रही है। लेकिन, अब उसने ऐसा काम किया है जिसे सुनकर महात्मा गांधी के प्रशंसक जरूर खुश हो सकते हैं।
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पहली बार महात्मा गांधी के ऊपर लिखी किसी किताब का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ है और इसे सोमवार को चीन की प्रतिष्ठित पीकिंग यूनिवर्सिटी में रिलीज किया गया। इस तरह से देर से ही सही, चीनी सरकार ने महात्मा गांधी को मान्यता देनी शुरू की है।
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रिटायर्ड एंबेसडर पास्कल एलेन नज़ारेथ की किताब 'गांधी-नॉन वायलेंट रिवोल्युशनरी' का चीनी भाषा में अनुवाद किया गया है।
चीन के एकेडमिक सर्किल्स में महात्मा गांधी और उनके विचारों को शायद ही कभी मान्यता दी गई। इसका कारण यह रहा कि महात्मा गांधी और चीन के नेता माओ के विचारों में बहुत अंतर था।
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लेकिन गांधी का मूर्ति जब 2005 में बीजिंग में स्थापित की गई तो दुनिया को लगा कि चीन में भी गांधी को सम्मान मिलना शुरू हो गया है।
किताब रिलीज होने के मौके पर साउथ एशियन स्टडीज डिपार्टमेंट के डायरेक्टर प्रोफेसर जियांग जिंगकुई ने बताया कि माओ और गांधी के विचारों में अंतर होने के कारण चीन ने कभी गांधी में बहुत रूचि नहीं दिखाई। इस बारे में अभी बहुत कुछ किया जाना है।
चीन में इंडियन एंबेसडर एस जयशंकर ने इस बारे में कहा कि इस किताब में गांधी के विचारों का दुनिया पर पड़े प्रभाव के बारे में बताया गया है और उम्मीद है कि इसे पढ़कर चीन के लोगों की उनमें रूचि और बढ़ेगी। इस किताब के लेखक पास्कल एलेन नज़ारेथ हैं।