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मोदी के प्रस्ताव से मुश्किल में चीन, हां कहता तो फंसता

Fri, 05 Jun 2015 01:51 PM IST
Updated Fri, 05 Jun 2015 01:51 PM IST
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China rejects India's request for clarity on LAC

चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति स्पष्ट करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव को करीब करीब खारिज करते हुए कहा है कि वह सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए भारत के साथ आचार-संहिता के एक समझौते को तरजीह देगा।

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प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर चीन की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में चीन के विदेश मंत्रालय में एशियाई मामलों के उप महानिदेशक हुआंग जिलियान ने कहा कि एलएसी पर परस्पर स्थितियों को स्पष्ट करने के पूर्ववर्ती प्रयासों के दौरान दिक्कतें आ चुकी हैं।
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उन्होंने कहा कि हम सीमा क्षेत्र में जो कुछ भी करें, वह रचनात्मक होना चाहिए। वह वार्ता प्रक्रिया में अवरोधक नहीं बल्कि आगे बढ़ाने वाला होना चाहिए।

चीन का दावा, मोदी का प्रस्ताव मानने से होगी मुश्किल

China rejects India's request for clarity on LAC

हुआंग ने पिछले महीने हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के परिणामों के बारे में भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल से कहा कि यदि हमें लगता है कि एलएसी को स्पष्ट करना आगे बढ़ाने वाला कदम है तो हमें आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन यदि हमें लगता है कि यह अवरोधक होगा और स्थिति को आगे जटिल कर सकता है तो हमें सावधान रहना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण यह है कि हमें सीमा पर शांति सुनिश्चित करने के लिए सीमा पर नियंत्रण एवं प्रबंधन का कोई एक उपाय नहीं बल्कि कुछ समग्र उपाय तलाशने होंगे। हम आचार संहिता पर एक समझौते की कोशिश कर सकते हैं और उसे मूर्त रूप दे सकते हैं।


उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास अब भी मिलकर खोज करने का समय है। हमें व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

यह पूछे जाने पर कि एलएसी के स्पष्टीकरण पर चीन को आपत्ति क्यों है जिसके बारे में मोदी ने कहा था कि इससे दोनों पक्षों को स्थितियां जानने में मदद मिलेगी, हुआंग ने कहा, हमने कुछ साल पहले इसे स्पष्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन उसमें मुश्किलें आ गई थीं, जिससे जटिल स्थिति उत्पन्‍न हो गई थी।

चीन सागर में भारत के तेल खनन का किया विरोध

China rejects India's request for clarity on LAC

वहीं, चीन ने दक्षिण चीन सागर में भारत के तेल खनन का विरोध किया तो दूसरी ओर उसने पीओके के रास्ते आर्थिक गलियारा योजना को रोजगार से जुड़ी परियोजना बताते हुए इसका बचाव किया है।

हुआंग ने कहा चीनी कंपनी दक्षिण एशियाई पड़ोसी के साथ विवादास्पद इलाके में काम करने जाती है तो भारत विरोध में प्रतिक्रिया देगा। वैसे ही ओएनजीसी द्वारा वियतनाम के दावे वाले क्षेत्र में उत्खनन में भागीदारी पर चीन ऐतराज जताता है।

चीन का कहना है कि सीमा विवाद सिर्फ 2000 किलोमीटर तक सीमित है, जो कि अधिकतर अरुणाचल प्रदेश में पड़ता है लेकिन भारत इस बात पर जोर देता है कि यह विवाद सीमा के पश्चिमी हिस्से में लगभग 4000 किलोमीटर तक फैला है, विशेष तौर पर अक्साई चिन जिस पर चीन ने वर्ष 1962 के युद्ध में कब्जा कर लिया था। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं के 18 दौर आयोजित हो चुके हैं।

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