फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   china newspaper raised questions at modi's gujarat model

मोदी के गुजरात मॉडल पर चीन ने भी उठाए सवाल

Fri, 04 Sep 2015 08:34 AM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 08:34 AM IST
विज्ञापन
china newspaper raised questions at modi's gujarat model

गुजरात में पाटीदार समाज के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर हुई हिंसा के मुद्दे पर जहां राज्य सरकार निशाने पर है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।

विज्ञापन


विपक्ष इस हिंसा से हुए जान-माल के नुकसान के लिए राज्य और केंद्र सरकार को दोषी ठहरा रहा है, तो अब पड़ोसी मुल्क चीन ने भी मोदी के गुजरात मॉडल पर निशाना साधा है।
विज्ञापन


चीन के एक सरकारी अखबार ने गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर हाल ही में हुई हिंसा का हवाला देते हुए विकास के 'गुजरात मॉडल' पर सवाल खड़े किए हैं।

पढ़िए, क्या कहा चीन ने?

china newspaper raised questions at modi's gujarat model

चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार में लिखे एक लेख में कहा गया है, 'अगर गुजरात मॉडल इतना ही सफल और परिवर्तनकारी था तो लोग वहां जाति के नाम पर कैसे इतने लामबंद हो गए कि हिंसा पर उतारू हो गए।'

अखबार ने लिखा है कि मौजूदा उथल-पुथल के बाद समृद्ध और वाइब्रेंट गुजरात की उस छवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिस छवि को मोदी दुनियाभर में बेचने की कोशिश में लगे रहते हैं।

अखबार में आगे लिखा गया है, 'मोदी और कुछ अन्य लोगों का मानना है कि 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले अर्थव्यवस्था को सामने रखकर लड़ा गया था, लेकिन देश में जाति आधारित राजनीति अभी भी कायम है।"

'पुलिस की निष्क्रिया और अधिकता से हुई हिंसा'

china newspaper raised questions at modi's gujarat model

चीनी अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस मंत्र पर भी सवाल उठाया, जिसमें मोदी कहते हैं कि विकास सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है। अखबार ने लिखा है कि ऐसे बयान एक बार फिर गुजरात के अल्पसंख्यकों को सान्तवना देने में नाकाम साबित हुए हैं।

अखबार में लिखा गया है, 'आर्थिक विकास सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। सच्चाई यह है कि तेजी से आगे बढ़ रहे भारत के राज्य गरीबी में जीने को मजबूर अपने ही लोगों को दरकिनार करने के बाद सांप्रदायिक हिंसा से खुद को नहीं बचा पा रहे हैं।'

अखबार ने लिखा है कि अगर गुजरात में 2002 में पुलिस की निष्क्रियता के कारण हिंसा भड़की थी तो 13 साल बाद उसी पुलिस बल के बहुत ज्यादा प्रयोग से हिंसा की वापसी हुई है।

लेख में सवाल खड़े किए गए हैं, 'क्या विकास सभी समस्याओं का हल निकाल सकता है? अगर सिर्फ अर्थव्यवस्था का ही विकास होता रहे तो क्या सामाजिक समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी? जाहिर है, इस सवाल का जवाब विकास के इस तरह के एक सरल समाधान की तुलना में ज्यादा जटिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed