मोदी के गुजरात मॉडल पर चीन ने भी उठाए सवाल
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गुजरात में पाटीदार समाज के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर हुई हिंसा के मुद्दे पर जहां राज्य सरकार निशाने पर है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
विपक्ष इस हिंसा से हुए जान-माल के नुकसान के लिए राज्य और केंद्र सरकार को दोषी ठहरा रहा है, तो अब पड़ोसी मुल्क चीन ने भी मोदी के गुजरात मॉडल पर निशाना साधा है।
चीन के एक सरकारी अखबार ने गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर हाल ही में हुई हिंसा का हवाला देते हुए विकास के 'गुजरात मॉडल' पर सवाल खड़े किए हैं।
पढ़िए, क्या कहा चीन ने?
चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार में लिखे एक लेख में कहा गया है, 'अगर गुजरात मॉडल इतना ही सफल और परिवर्तनकारी था तो लोग वहां जाति के नाम पर कैसे इतने लामबंद हो गए कि हिंसा पर उतारू हो गए।'
अखबार ने लिखा है कि मौजूदा उथल-पुथल के बाद समृद्ध और वाइब्रेंट गुजरात की उस छवि पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिस छवि को मोदी दुनियाभर में बेचने की कोशिश में लगे रहते हैं।
अखबार में आगे लिखा गया है, 'मोदी और कुछ अन्य लोगों का मानना है कि 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले अर्थव्यवस्था को सामने रखकर लड़ा गया था, लेकिन देश में जाति आधारित राजनीति अभी भी कायम है।"
'पुलिस की निष्क्रिया और अधिकता से हुई हिंसा'
चीनी अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस मंत्र पर भी सवाल उठाया, जिसमें मोदी कहते हैं कि विकास सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है। अखबार ने लिखा है कि ऐसे बयान एक बार फिर गुजरात के अल्पसंख्यकों को सान्तवना देने में नाकाम साबित हुए हैं।
अखबार में लिखा गया है, 'आर्थिक विकास सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। सच्चाई यह है कि तेजी से आगे बढ़ रहे भारत के राज्य गरीबी में जीने को मजबूर अपने ही लोगों को दरकिनार करने के बाद सांप्रदायिक हिंसा से खुद को नहीं बचा पा रहे हैं।'
अखबार ने लिखा है कि अगर गुजरात में 2002 में पुलिस की निष्क्रियता के कारण हिंसा भड़की थी तो 13 साल बाद उसी पुलिस बल के बहुत ज्यादा प्रयोग से हिंसा की वापसी हुई है।
लेख में सवाल खड़े किए गए हैं, 'क्या विकास सभी समस्याओं का हल निकाल सकता है? अगर सिर्फ अर्थव्यवस्था का ही विकास होता रहे तो क्या सामाजिक समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी? जाहिर है, इस सवाल का जवाब विकास के इस तरह के एक सरल समाधान की तुलना में ज्यादा जटिल है।