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भारत-यूएस की दोस्ती पर चीनी मीडिया के सवाल

Tue, 27 Jan 2015 09:37 AM IST
Updated Tue, 27 Jan 2015 09:37 AM IST
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china' media raise question about india and america friendship

अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा भले भारत के मीडिया में सुर्खियां बटोर रही हो लेकिन चीन और पाकिस्तान के मीडिया ने राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'दोस्ती' को 'सतही' बताया है। चीनी विशेषज्ञ और अखबार मानते हैं कि ओबामा के दौरे का मकसद भारत को चीन के खिलाफ इस्तेमाल करने की एक और कोशिश है।

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चीनी सरकार के अख़बार ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में भारत और चीन को ये कहते हुए चेतावनी दी गई है कि "वे पश्चिम के बिछाए जाल में न फंसे।"

घिसा पिटा रवैया


ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है - “नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिका राष्ट्रपति के एक दूसरे को गले मिलने की घटना को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के पीछे मीडिया की वही पुरानी घिसी-पिटी मानसिकता नजर आती है।”
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लेख कहता है,“बंधी बंधाई लीक पर सोचने का एक चलन बन गया है जिसे पश्चिम खूब प्रचारित कर रहा है। साफ है कि इसके पीछे उसका मकसद चीनी ड्रैगन और भारतीय हाथी को एक दूसरे का चिर-परिचित और स्थाई प्रतिद्वंद्वी बताना है।”
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गंभीर मतभेद

china' media raise question about india and america friendship

ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीन और भारत ये नहीं चाहते लेकिन पश्चिमी प्रभाव में भारत फिसलता चला जा रहा है। अन्य जगह चीनी मीडिया में कहा गया है कि मोदी और ओबामा केवल बाहरी तौर पर एक साथ हैं क्योंकि दोनों नेताओं के बीच अभी कई मुद्दों पर भारी मतभेद बरकरार हैं।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अमरीका और भारते के बीच उभरे कूटनीतिक मतभेद को याद करते हुए मोदी और ओबामा की दोस्ती को और गर्मजोशी को 'सतही' बताया है और कहा है कि दोनों देश के दिग्गजों के बीच भारी मतभेद हैं।

एजेंसी का कहना है, “ये एक सतही मेल-मिलाप है जिसे एक सौदे की तरह देखा जाना चाहिए क्योंकि ओबामा को भारत की ज़रूरत है ताकि अमेरिका राजनीति में वे अपनी उपलब्धियां गिना सकें।"

अन्य जगहों पर चीनी मीडिया ने ओबामा मोदी की मुलाकात के बीच आने वाले मुद्दे गिनाते हुए - पर्यावरण, कृषि संबंधी विवाद और परमाणु ऊर्जा सहयोग की बात की है।

लेख के अंत में कहा गया, “मतभेदों की इतनी लंबी लिस्ट के सामने होते हुए भारत को पक्का दोस्त बना पाना ओबामा के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।"

असुरक्षित पाकिस्तान

china' media raise question about india and america friendship

पाकिस्तानी अखबारों ने भारत को नसीहत दी है कि वह पाकिस्तान की नकारात्मक छवि दिखाने के लिए ओबामा के दौरे का इस्तेमाल न करे।

डॉन अखबार ने भारत के मीडिया को 'राष्ट्रवादी मीडिया' कहते हुए लिखा है कि वह पाकिस्तान पर वार करने के लिए ओबामा के दौरे का इस्तेमाल करने से बाज़ आए।

डॉन अखबार लिखता है, "मुश्किल भले हो, लेकिन चुप्पी फिलहाल बेहतर विकल्प है। किसी तरह की सकारात्मक बातचीत के लिए पाकिस्तान और भारत को लगातार और फिजूल की होड़ से दूर रहना होगा। ओबामा यदि भारत के दौरे पर गए हैं तो ये भारत का मामला है। जब ओबामा पाकिस्तान आएंगे तब ये पाकिस्तान और अमरीका का मामला होगा।"

अहम बदलाव


'द नेशन' अखबार का कहना है कि संभावना है कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की अमरीका की ओर से तारीफ किए जाने के बाद पाकिस्तान खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे।

'द नेशन' का कहना है, "अमरीका हमेशा से भारत की, यहां तक कि अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की तारीफ खुले दिल से करता रहा है। इससे पाकिस्तान पिछले कुछ दिनों से खुद को असुरक्षित और असहज महसूस करने लगा है।"

अखबार मानता है, "अमरीका को बताने वाला नहीं है कि ताकतवर और आक्रामक भारत के सामने, पाकिस्तान या कश्मीर के लोगों का जीवन स्तर बेहतर कौन बनाएगा। सत्ता के इस खेल में, ओबामा की भारत यात्रा अमेरिका विदेश नीति में अहम बदलाव की घड़ी है।"

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