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तीर्थयात्रियों को तोहफा, कैलाश मानसरोवर के लिए नया रूट

Mon, 02 Feb 2015 03:32 PM IST
Updated Mon, 02 Feb 2015 03:32 PM IST
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china is agree on kailash mansarovar yatra's new root

भारत और चीन के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए नया रूट खोलने पर सहमति बनती दिख रही है। बीजिंग पहुंचीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की उनके चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने सिक्किम होते हुए तिब्बत में कैलास मानसरोवर यात्रा के दूसरे रास्ते को खोलने के लिए दस्तावेजों का आदान प्रदान किया।

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इस नए मार्ग से भारतीय तीर्थयात्रियों को फायदा होगा। नाथुला दर्रे से गुजरने वाले इस मार्ग से भारतीय श्रद्धालु बस से भी यात्रा कर सकेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट कर जानकारी दी कि भारत और चीन ने वर्ष 2015 में कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए अतिरिक्त मार्ग के तौर तरीकों पर नोट्स का आदान प्रदान किया।
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मौजूदा मार्ग लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड में 2013 में आई भीषण बाढ़ में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। 22 दिन तक चलने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा पर हर साल 18 बैच में 1000 से अधिक श्रद्धालुओं को भेजा जाता है।

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सुषमा ने पेश किया छह सूत्रीय मॉडल

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बीजिंग के अपने पहले दौरे पर आईं विदेश मंत्री ने भारत-चीन संबंधों को मजबूत बनाने के लिए रविवार को छह सूत्री मॉडल पेश किया। सुषमा ने भारत-चीन मीडिया फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों को व्यापक आधार वाले द्विपक्षीय संबंधों, सहयोग के नए क्षेत्रों, क्षेत्रीय और वैश्विक हितों को साथ लेकर इसे एशिया की सदी बनाने के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पिछले आठ महीनों में भारत में कई बदलाव हुए हैं। सुषमा ने कहा कि भारत-चीन संबंध आज उस स्तर पर पहुंच चुके हैं जहां हम उन क्षेत्रों के बारे में बात कर सकते हैं जिनके बारे में एक साल पहले सोचा नहीं जा सकता था।

दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को बनाने और उन्हें विस्तार देने में काफी प्रगति की है। इससे शांति बनाए रखने और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि भारत चीन के साथ लगती सीमा विवाद के जल्द समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

सीमा पर लगातार दोनों देशों के बीच विवाद

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मालूम हो कि चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश से लगती जमीन पर अपना दावा करता रहा है। सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच 17 राउंड की बातचीत हो चुकी है।

पिछले साल सितंबर में चीनी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान भी यह मसला उठा था। विदेश मंत्री ने चीनी भाषा में देश की प्रमुख कूटनीति पत्रिका ‘इंडिया पर्स्पेक्टिव’ को लांच किया। यह पत्रिका देश की समृद्ध संस्कृति और परंपरा से चीनी लोगों को अवगत कराएगी।

भारत कंपनियों के लिए अपना बाजार खोले चीन

दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की जटिलता का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि चीन अपने बाजार को भारतीय कंपनियों के लिए खोलेगा। साथ ही उन्होंने भारत में चीनी कंपनियों के लिए व्यापार को आसान बनाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि चीन हमारा व्यापार और साजोसामान का बड़ा साझीदार है।

दोनों ही देश एक दूसरे के यहां निवेश बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं और दोनों ही देशों के बीच संपर्क को मजबूत बनाने की शुरुआत भी कर दी गई है। इन आधारों पर अब हम अपने आर्थिक सहयोग को एक नई ऊंचाई तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

शी जिनपिंग से आज करेंगी मुलाकात

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सोमवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगी। इससे पहले रविवार को उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की।

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