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चीन ने पाकिस्तान को दिया अमेरिका से भी बड़ा तोहफा

Mon, 20 Apr 2015 09:41 PM IST
Updated Mon, 20 Apr 2015 09:41 PM IST
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China gave Pakistan the greatest gift from america.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे। इस दौरान दोनों देशों के बीच 46 अरब डॉलर के पाक-चीन आर्थिक गलियारे और ऊर्जा परियोजनाओं समेत 51 द्विपक्षीय समझौतों पर दस्तखत किए गए।

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चीन का यह करार पाक में बीते दस सालों में किए गए कुल अमेरिकी निवेश (करीब 31 अरब डॉलर) से कहीं ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि पाक में बीते नौ सालों में किसी चीनी राष्ट्रपति का यह पहला दौरा है।
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इससे पहले रावलपिंडी के नूर खान हवाई अड्डे पर पत्नी पेंग लियुआन के साथ अपने विमान से उतरे चीनी राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। जिनपिंग के स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर पाक के राष्ट्रपति ममनून हुसैन, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, सेना प्रमुख राहील शरीफ और कई मंत्री मौजूद थे।

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46 अरब डॉलर के 51 समझौतों पर दस्तखत

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इन 51 सहमति के साझापत्र (एमओयू) पर दस्तखत के वक्त शरीफ, जिनपिंग समेत दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।अपने संबोधन के दौरान पीएम शरीफ ने चीन को गहरा दोस्त करार दिया है।

उन्होंने कहा, ‘हाल के दिनों में चीन और पाकिस्तान को बदलते हुए कई बडे़ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालातों से गुजरना पड़ा है। मगर इस दौरान हमारे रिश्ते और मजबूत ही हुए हैं।’

वहीं जिनपिंग ने पाक की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद की इच्छा जताते हुए कहा कि इस आर्थिक गलियारे से दोनों देशों के लोगों को फायदा पहुंचेगा।

इससे दक्षिण, मध्य व पश्चिम एशिया समेत मध्य पूर्व और अफ्रीका तक व्यापार और निवेश का सस्ता और छोटा रास्ता भी तैयार होगा। यह गलियारा वास्तव में क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरेगा। माना जा रहा है कि दौरे में पाक चीन से करीब पांच अरब डॉलर की आठ पनडुब्बियां भी खरीदने की पेशकश कर सकता है।

पाक पीएम ने चीन को गहरा दोस्त बताया

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क्या है आर्थिक गलियारा?
चीन के काशगर से पाक के अरब सागर में स्थित ग्वादर बंदरगाह तक जोड़े जाने वाले 46 अरब डॉलर के इस नेटवर्क को चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर कहा जाता है जो पीओके से होकर गुजरेगा।

योजना के तहत करीब तीन हजार किलोमीटर लंबा सड़क (सिल्क रोड), रेल और पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा। पाक को इससे अपने ढांचागत विकास और ऊर्जा जरूरतों के पूरा होने की उम्मीद है।

हालांकि पाक ने उम्मीद जताई है कि चीन उसकी ऊर्जा परियोजनाओं में 37 अरब डॉलर का निवेश करेगा जिससे वह 16,400 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी।

भारत की चिंता
भारत को आशंका है कि भविष्य में चीन ग्वादर बंदरगाह को नौसैनिक ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। साथ यहां से चीन के लिए होर्मुज और अरब की खाड़ी के दरवाजे खुल जाएंगे, जहां से वह पश्चिम एशिया के तेल भेजने के रास्तों के बेहद करीब पहुंच सकता है। ये वे रास्ते हैं जहां से भारत अपना अधिकांश तेल आयात करता है।

अफगानिस्तान में शांति बहाली का किया आह्वान
जिनपिंग ने अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए भी पाक से बेहतर कोशिश करने की अपील की है। उसने इस दिशा में साथ काम करने की इच्छा जताई है। अफगानिस्तान के पुननिर्माण कार्यों और विकास में जुटे भारत के बढ़ते प्रभावों से पाक भी चिंतित है।

भारत-पाक के बीच शांति वार्ता चाहता है चीन
चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता को बढ़ावा देने की बात कही है। चीनी विदेश मंत्रालय के  प्रवक्ता ने कहा है कि शांति वार्ता को बढ़ावा देना, चीन के दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का अहम हिस्सा है।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत-पाक के संबंधों में सुधार से पूरे क्षेत्र को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह पाक के साथ आपसी सहयोग बढ़ाकर पड़ोसी देशों के लिए उदाहरण पेश करेंगे।

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