छिन सकता है माननीयों के बच्चों का आरक्षण
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राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की है कि संसद और राज्य की विधनासभाओं के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों के बच्चों को ओबीसी कोटे के अंतर्गत आरक्षण के लिए पात्र नहीं हैं।
इस संबंध में ओबीसी पैनल ने कहा है कि जो भी व्यक्ति संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए चुन लिया जाता है उसका सामाजिक और आर्थिक स्तर बेहतर हो जाता है, ऐसे में उसे क्रिमी लेयर में आना चाहिए।
यह प्रस्ताव उन शिकायतों के बाद दिया गया है जिसमें यह कहा गया है कि जन प्रतिनिधियों के बच्चों को भी गैर-क्रिमी लेयर का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है।
प्रथम श्रेणी के अधिकारी भी नहीं है आरक्षण के पात्र
पैनल ने यह भी प्रस्तावित किया है कि केन्द्र और राज्य सरकारों में प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को भी आरक्षण के लाभों से बाहर किया जाना चाहिए। बावजूद की वह अधिकारी अपने पद पर सीधा नियुक्त हुआ हो अथवा प्रमोशन से उस पद पर पहुंचा हो।
फिलहाल प्रथम श्रेणी का अधिकारी उन्हें ही माना जाता है जो सीधे पद पर नियुक्त हुए हैं। आयोग का कहना है कि कोई भी प्रथम श्रेणी का अधिकारी सामाजिक उन्नयन का वह स्तर पा लेता है, जहां उसे आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होती।
आयोग ने कहा कि प्रथम श्रेणी का वह अधिकारी जो प्रमोट होकर उस पद पर पहुंचा है, वो सीधे नियुक्त हुए अधिकारी से ज्यादा तनख्वाह पाता है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि क्रीमी लेयर की आय सीमा 6 लाख से बढ़ाकर साढ़े 10 लाख किया जाए।
आयोग ने यह भी कहा है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए मंडल आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होती। यह मसौदा आयोग ने सामाजिक न्याय मंत्रालय को भेजा है।