स्मार्टफोन देने का नतीजा, इंटरनेट के आदी हो रहे बच्चे

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 07 Nov 2012 08:46 AM IST
children are being addicted to mobile internet
तेजी से इंटरनेट की आदी हो रही दुनिया में अब बच्चे भी किसी से पीछे नहीं हैं। एक शोध में यह सामने आया है कि 1994 के बाद जन्म लेने वाले (जेड जेनरेशन के) करीब 30 लाख बच्चे मोबाइल की 3जी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शोध के मुताबिक शहरों में ज्यादातर बच्चे टीवी देखने की बजाय मोबाइल पर अपना समय ज्यादा व्यतीत कर रहे हैं। टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनी एरिक्शन की उपभोक्ता लैब द्वारा देश के 16 शहरों के 7700 परिवारों के 3500 बच्चों और 1000 अभिभावकों पर कराए गए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।

एरिक्शन इंडिया के वाइस प्रेसीडेंट और मार्केटिंग हेड अजय गुप्ता ने यहां पत्रकारों को बताया कि 690 लाख शहरी बच्चों में से करीब 300 लाख के पास निजी मोबाइल फोन हैं और इनमें से 30 लाख बच्चे अपने मोबाइल फोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने कहा कि शोध में पाया गया कि ‘जेड’ जेनरेशन के सात फीसदी बच्चों के पास खुद के स्मार्टफोन हैं, वहीं 20 फीसदी ऐसे बच्चों के पास भी निजी स्मार्टफोन हैं, जिनकी उम्र 11 साल से भी कम है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के दौरान जेड जेनरेशन के बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखा गया, इस पीढ़ी के करीब 58 फीसदी बच्चे टीवी देखने की बजाय मोबाइल फोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करने में ज्यादा वक्त देते हैं।

गुप्ता ने बताया कि शोध में सामने आया है कि 1994 से 2004 के बीच जन्म लेने वाले इन जेड जेनरेशन के बच्चों में टीवी की बजाय मोबाइल इंटरनेट के प्रति रुचि सर्वाधिक पाई गई और ये अपना अधिकतर समय मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करने में ही बिताते हैं।

पैरेंट्स रख रहे हैं नजर
बच्चों के मोबाइल इंटरनेट के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए उनके अभिभावक भी जागरूक हो रहे हैं। वे अपने बच्चों के मोबाइल फोन पर नजर रख रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका बच्चा कहीं गलत साइट्स को तो सर्च नहीं कर रहा है।

गुप्ता ने बताया कि जेनरेशन गैप होने के बावजूद ज्यादातर अभिभावक मोबाइल मीडिया के इस्तेमाल से भलीभांति परिचित हो गए हैं। लिहाजा वे अपने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर काफी सतर्कता बरत रहे हैं। शोध में सामने आया है कि करीब 63 फीसदी अभिभावक मोबाइल पर अवांछित सामग्री को ब्लॉक कराने के इच्छुक हैं। वहीं, कुल 76 फीसदी शहरी अभिभावक इंटरनेट सर्विस देने वाली कंपनियों से अपने बच्चों के मोबाइल की कॉल और मैसेज डिटेल उपलब्ध कराने को कहते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 9 से 18 साल के ज्यादातर बच्चे अपने मोबाइल फोन पर एक गोपनीय स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं ताकि कोई अन्य उनके फोन में कुछ देख न सके।

Spotlight

Most Read

India News Archives

पहली बार बांग्लादेश की धरती से विद्रोहियों के ठिकाने पूरी तरह से साफ: BSF

भारत की पूर्वी सीमा पर दशकों से चले आ रहे सीमा पार विद्रोही शिविरों को लेकर एक अहम जानकारी आई है।

18 दिसंबर 2017

Related Videos

बागपत के स्कूल में गैस लीक, 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बागपत में गांव छपरौली के एक प्राथमिक स्कूल में गैस सिलेंडर लीक होने का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मिड डे मील के लिए आया सिलेंडर लीक हो रहा था, गैस लीकेज इतनी ज्यादा थी कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

6 मई 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper