रुश्दी पर चिदंबरम के बयान से कांग्रेस में तकरार
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राजीव गांधी सरकार द्वारा 27 साल पहले लेखक सलमान रुश्दी की किताब ‘द सटैनिक वर्सेज’ पर पाबंदी लगाने के फैसले को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के गलत बताने पर कांग्रेस दो खेमों में बंट गई है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने जहां चिदंबरम का समर्थन किया है, वहीं हंसराज भारद्वाज और संदीप दीक्षित ने तीखी आलोचना की है। इस बीच रुश्दी ने ट्वीट कर कहा है कि गलती स्वीकार करने में ही कांग्रेस को 27 साल लग गए। अब इसे सुधारने में कितना वक्त लगेगा।
चिदंबरम के बचाव में उतरे मनीष तिवारी ने कहा कि इस स्वीकारोक्ति में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि 27 साल पहले अगर कुछ गलत हुआ था और वह अब इसे स्वीकार कर रहे हैं तो इसका सही भावना के साथ स्वागत किया जाना चाहिए।
रुश्दी की किताब पर कांग्रेस में तकरार
वहीं पूर्व कानून मंत्री और राज्यपाल रहे भारद्वाज ने इस फैसले को राष्ट्रहित में लिया गया फैसला करार दिया। उन्होंने कहा कि तब चिदंबरम बच्चे थे। राजीव गांधी ने जो कुछ किया उस पर मुझे गर्व है।
आखिर रुश्दी के दर्शन को बेच कर देश को क्या मिल रहा था। पार्टी के एक अन्य नेता और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने भी चिदंबरम की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि 27 साल बाद किसी फैसले के औचित्य पर सवाल खड़ा करना सही नहीं है। चिदंबरम उस समय क्यों चुप थे। अगर कुछ गलत हो रहा था तो उन्हें उसी समय अपनी राय पार्टी और सरकार के सामने रखनी चाहिए थी।
मालूम हो कि चिदंबरम ने शनिवार को एक कार्यक्रम में रुश्दी की किताब पर प्रतिबंध लगाने के राजीव गांधी सरकार के फैसले को गलत ठहराया था।
उन्होंने कहा था कि मुझे यह स्वीकार करने में थोड़ी भी हिचक नहीं है कि प्रतिबंध का फैसला एक गलती थी। दरअसल उस दौरान मुस्लिम संगठनों के तीखे विरोध के बीच राजीव सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था।