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'कायरता' के आरोप में 18 जवान निलंबित

Sat, 06 Sep 2014 03:34 PM IST
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली Updated Sat, 06 Sep 2014 03:34 PM IST
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chhattisgarh jawans suspended in charge of cowardice

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में तैनात सुरक्षा बल के 18 जवानों को 'कायरता' के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इनमें से 17 जवान केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की 80वीं बटालियन के हैं जबकि एक जवान छत्तीसगढ़ पुलिस का है जो तोंगपाल थाने में तैनात है।

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यह निलंबन 11 मार्च को सुकमा ज़िले के तहकवाड़ा की घटना की जांच के बाद लिया गया है जिसमें माओवादियों के हमले में सुरक्षा बल के 15 जवान मारे गए थे। मारे गए जवानों में 11 सीआरपीएफ़ की 80वीं बटालियन के थे जबकि चार जवान ज़िला पुलिस बल के। इसके अलावा एक आम नागरिक की भी मौत हुई थी।
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निलंबित किए गए जवानों पर घटना स्थल से भाग जाने का आरोप लगा था जिसके लिए विभागीय जांच बैठाई गई थी। पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जांच में निलंबित किए गए सभी जवानों को कायरता का दोषी पाया गया है।
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बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक एसआरपी कल्लूरी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबित किए गए जवानों में सीआरपीएफ़ के एक निरीक्षक, दो सहायक उप निरीक्षक और 14 आरक्षी शामिल हैं जबकि तोंगपाल थाने में तैनात जवान को भी निलंबित किया गया है।

यह पहला मौक़ा है जब किसी बड़ी नक्सली घटना के बाद बचे हुए जवानों को कायरता के आरोप में निलंबित किया गया हो।

हालांकि इस निलंबन को पुलिस महकमे में सही तरह से नहीं देखा जा रहा है क्योंकि कुछ का मनना है कि जिन इलाक़ों में संघर्ष चल रहा हो वहां इस तरह के निलंबन से जवानों के मनोबल पर नाकारात्मक असर पड़ेगा।

जवानों में प्रेरणा की कमी

chhattisgarh jawans suspended in charge of cowardice

उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक प्रकश सिंह कहते हैं, ''अक्सर देखा गया है कि संघर्ष के इलाकों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों की प्रेरणा में कमी होती है। क्योंकि उनके पास सुविधाएं नहीं है। उनका नेतृत्व करने वाले अच्छे अधिकारियों की भी कमी है।''

प्रेरणा की कमी की वजह से कई बार जवान संघर्ष करने की बजाय पीछे हटना बेहतर समझते हैं।

पूर्वी और मध्य भारत के नक्सल प्रभावित इलाक़ों में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। कुछ इलाक़ों में तो उनको बुनियादी सुविधाओं के बिना ही रहना पड़ रहा है।

बस्तर संभाग में ही कई इलाके ऐसे भी हैं जहाँ सुरक्षा बल के जवान अपने कैंपों में कैदियों की तरह रह रहे हैं। इन कैंपों में उनके लिए राशन पहुंचाना तक जंग लड़ने के ही बराबर है।

कुछ जानकारों को लगता है कि इस तरह निलंबित किए जाने के बाद बाक़ी जवानों का मनोबल जरूर टूट जाएगा।

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