'पांच दिन से नाइटी में ही हूं, मदद कैसी'
शहर के कई पुराने इलाकों में पानी बुरी तरह से भरा हुआ है और हजारों लोग अभी भी बेघर हैं। कोट्टुरपुरम इलाके में कई मकान ऐसे हैं जिनकी पहली मंजिल को पानी अभी तक निगले हुए हैं।
हमसा और उनका परिवार इस आपदा के अलावा देर से मिल रही मदद से भी आहत है। उन्होंने बताया, "पांच दिन से इसी नाइटी में यहाँ-वहां घूम रही हूं, मदद कैसी होगी। हमारा घर पहली मंजिल पर था और हमें तीसरी पर जाकर शरण लेनी पडी। सब सामान बर्बाद हो गया है, न जाने कब तक भटकना पडेगा"।
कोट्टुरपुरम से करीब दो किलोमीटर आगे चलने पर एक बस्ती हुआ करती थी जिसका अब नामोनिशान तक नहीं बचा है। स्थानीय प्रशासन ने यहाँ एक कैंप लगाया है जहाँ दिन रात लोग अपने डूबे हुए सामान की शिकायत दर्ज करा रहे हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति बर्नाड ने कहा, "अगर ये निचला इलाका था तब आखिर सरकार ने हमें यहाँ घर बनाने की इजाजत ही क्यों दी थी? अब हमारे घरों में पानी है तो उसे बाहर भी निकलवाया जाए"।
लेकिन हम गरीबों का क्या होगा?
कुछ ऐसा ही मंजर गणेशपुरम में मिला जहाँ दर्जनों घर पानी भरने से वीरान हो
चुके हैं और उनमें रहने वाले बच्चे-औरतें और बूढे सभी पास के स्कूलों में
या बस-स्टॉप पर रात बिता रहे है।
यहीं के निवासी प्रभु बताते है, "पास के
महंगे इलाकों में तो बिजली कल शनिवार को बहाल हो गई लेकि हम गरीबों का क्या
होगा। सिर्फ खाने के पैकेटों पर जी रहे हैं और उन्हें लेने के लिए भी
बारिश में खडे होकर लाईन लगानी पडती है"। चेन्नई के सैदापेट इलाके में भी
हालात कष्टकारी बने हुए हैं।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार
'सरकार कपडों से लेकर खाने तक की सभी सुविधा मुहैया करा रही है'। लेकिन
पूरे इलाके में अभी भी ट्यूबवेलों के जरिए पानी निकाल जा रहा है और दिन भर
सडकों पर खाना पहुंचाने वाली गाडियों के आगे लंबी कतारें लगी रहतीं हैं।
जमीनी स्थिति को देखते हुए कहना गलत नहीं होगा कि स्थिति सामान्य होने में
हफ्तों लग सकते हैं।