देश में इबोला वायरस ने दी दस्तक!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफ्रीका में अब तक हजारों लोगों की जान ले चुके इबोला वायरस ने भारत में भी दस्तक दे दी है।
देश में इबोला विषाणु से संक्रमित पहला संदिग्ध व्यक्ति तमिलनाडु में मिला है। गिनी से आए इस व्यक्ति को इबोला से संक्रमित होने का पता तब चला जब केंद्रीय स्वास्थ्यकर्मी चेन्नई एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच कर रहे थे।
एयरपोर्ट पुलिस के मुताबिक 31 वर्षीय यह व्यक्ति पार्थिबन थेनी जिले का निवासी है। वह दुबई से एमिरात के विमान से रविवार तड़के दो बजे चेन्नई पहुंचा था।
चेन्नई पहुंचते ही पार्थिबन ने तेज बुखार की शिकायत की जिसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने फौरन उसकी जांच की। जांच में इबोला संक्रमण के लक्षण पाए गए। बाद में उसे मद्रास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
गौरतलब है कि इस बीमारी की विभीषिका की वजह से ही विश्व स्वास्थ संगठन ने इसे अंतराष्ट्रीय महामारी घोषित किया है।
लखनऊ एयरपोर्ट पर अलर्ट
अफ्रीका में तेजी से फैले इबोला वॉयरस को लेकर यूपी के लखनऊ एयरपोर्ट पर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। दिल्ली से रोजाना 11 विमानों से करीब 2100 यात्री लखनऊ पहुंचते हैं।
एयरपोर्ट प्रशासन ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जरूरी कदम उठाने के लिए आवश्यक सुविधाएं देने की मांग की है। जबकि उसने राज्य के स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर एयरपोर्ट पर डॉक्टरों और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता कराने की मांग की है।
अफ्रीका से लखनऊ की कोई सीधी उड़ान नहीं है लेकिन दिल्ली होकर कनेक्टिंग विमान से यात्री लखनऊ पहुंच सकते हैं। ऐसे में लखनऊ आने वाले विमानों के यात्रियों से इबोला वायरस के पहुंचने का खतरा मंडराने लगा है।
एयरपोर्ट प्रशासन के पास अपनी कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है जिससे लखनऊ में आने वाले इस वायरस को रोका जा सके। इसे देखते हुए ही एयरपोर्ट प्रशासन ने स्वास्थ्य निदेशालय के साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी से इबोला वायरस की जांच और रोकथाम के लिए डॉक्टर और दवाएं मुहैया कराने की मांग की है।
चंडीगढ़ में उपलब्ध है टेस्ट की सुविधा
चंडीगढ़ में लाइबेरिया, गुएना और नाइजीरिया के छात्र पढ़ने और घूमने आते हैं। ऐसे में इस वायरस का खतरा यहां भी महसूस किया जा रहा है। शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को गाइडलाइंस भेजकर तैयार रहने को कहा गया है।
असिस्टेंट डायरेक्टर मलेरिया का कार्यवाहक पद संभाल रहे डा. अनिल गर्ग ने बताया कि शुक्रवार को ही मंत्रालय की ओर से गाइडलाइंस भेजी गईं हैं। फिलहाल इसका कोई ट्रीटमेंट और न ही वैक्सीन है। इसका एक ही बचाव है कि संक्रमित व्यक्ति से दूर रहे। यह वायरस डायरेक्ट ट्रांसफर नहीं होता है।
मसलन खांसी व पानी से नहीं फैलता बल्कि खून, मल व पसीने के संपर्क में आने से आता है। उन्होंने दावा किया कि चंडीगढ़ में फिलहाल कोई भी पाजिटिव केस नहीं मिला है। यदि कोई व्यक्ति अफ्रीकी देश से आया है या फिर वहां के किसी नागरिक के संपर्क में रहा है और उसे उल्टी-दस्त, बुखार, सिरदर्द, आंखें लाल होने और गले में कफ की शिकायत नजर आती है तो वह तुरंत ब्लड सैंपल चेक कराए।
इसके लिए आईजीएम एलाइजा टेस्ट, वायरस आइसोलेशन और पीसीआर टेस्ट कराएं जाते हैं। चंडीगढ़ में इस टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है।
इबोला के बारे में जानिए सब कुछ
इबोला के लक्षण दस्त, उल्टी और ब्लीडिंग है। इबोला संक्रमित लोगों की चमड़ी गलने लगती है। कुछ दिन बाद ऐसी स्थिति आती है कि हाथ, पैर के साथ-साथ पूरा शरीर गल जाता है।
इबोला वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, मल या पसीने से सीधे संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस यौन संपर्क और वायरस वाली डेड बाडी को गलत तरीके से डिस्पोज करने से भी फैल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला एक खतरनाक व जानलेवा वायरस है। वायरस संक्रमित होने के बाद व्यक्ति की मौत की आशंका 90 फीसदी तक होती है। अब तक इस पर कोई एंटी बायोटिक कारगर नहीं है और न ही इलाज के बाद बीमारी असर कम होता देखा गया है।
अगले साल तक इबोला का टीका
ब्रिटेन की दवा निर्माता कंपनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन ने इबोला विषाणु की रोकथाम के लिए टीका तैयार किया है। इसका क्लिनिकल परीक्षण सितंबर में शुरू किया जा सकता है। अगले साल तक इसके बाजार में उपलब्ध होने की संभावना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के टीका एवं प्रतिरक्षण मामलों के प्रमुख जीन मैरी ओ बेले के मुताबिक इस बीमारी के फैलने की तीव्रता के स्तर को देखते हुए टीके के क्लिनिकल परीक्षण पर खासा जोर दिया जा रहा है ताकि यह अगले साल से बाजार में उपलब्ध हो सके।
इसका परीक्षण सबसे पहले अमेरिका में किया जाएगा। इसके बाद ही इस बीमारी से प्रभावित अफ्रीकी देशों में इसका क्लिनिकल परीक्षण किया जाएगा।