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मलाला नहीं, OPCW को शांति का नोबेल

Fri, 11 Oct 2013 07:14 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 11 Oct 2013 07:14 PM IST
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chemical warfare group opcw won nobel peace prize 2013

इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार एंटी केमिकल वारफेयर ग्रुप ओपीसीडब्ल्यू को दिया जाएगा। नॉर्वे की राजधानी ऑस्लो में इस पुरस्कार का ऐलान हुआ।

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2013 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 259 लोगों का नामांकन हुआ था।

नोबेल पुरस्कार पाने की होड़ में तालिबान हमले में जिंदगी की जंग जीत चुकी पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई और बलात्कार पीड़िताओं के मददगार कांगो के डॉक्र डेनिस मुकवेगे भी शामिल थे।
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क्या है ओपीसीडब्ल्यू
ओपीसीडब्ल्यू यानी ऑर्गेनाइजेशन फॉर द प्रोबिहेशन ऑफ केमिकल वीपन्स ने दुनियाभर में रासायनिक हथियारों को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई है।

ओपीसीडब्ल्यू के महानिदेशक के राजनीतिक सलाहकार मलिक इलाही ने कहा, ‘हमेशा से हम शांति के लिए काम करते आए हैं। रासायनिक हथियार खतरनाक हैं, इनका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। संस्था का काम महज हथियारों को नष्ट करना नहीं बल्कि मानवीय हितों का संरक्षण भी है।’
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1992 ग्लोबल केमिकल वेपंस कनवेंशन के तहत इस संस्था की स्थापना 1997 में हुई और इसने हाल में इराक और लीबिया में रासायनिक हथियारों के जखीरे को नष्ट करने में सहयोग किया।

अमेरिका और रूस ने भी 2012 तक अपने जखीरे को पूरी तरह नष्ट करने की प्रतिबद्धता जताई थी पर वादा पूरा नहीं कर सके।

ओपीसीडब्ल्यू के प्रमुख अहमेत यूजूमकू ने कहा कि यह पुरस्कार हमारे स्टाफ को प्रोत्साहित करेगा, जो वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिए काम करते हैं। सीरिया को छोड़कर 80 फीसदी जखीरे को संस्था की निगरानी में नष्ट किया जा चुका है।

प्रथम (1914-18) और द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45) के दौरान रासायनिक हथियारों का जमकर इस्तेमाल हुआ था। इससे व्यापक स्तर पर जानमाल की हानि हुई थी।

इसलिए वैश्विक स्तर पर ऐसे मंच बनाने की वकालत शुरू हुई जो इन हथियारों को खत्म करने के दिशा में कदम उठाए।

1997 में हुई संस्था की स्थापना हुई थी। इसका वार्षिक बजट 100 मिलियन डॉलर है और इसमें 500 स्टाफ है। इस संगठन में कई देश शामिल हैं।

हाल ही में सीरिया में सैन्य संघर्ष के दौरान रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। इससे सैकडो लोगों की जान चली गई थी।

सीरिया को रासायनिक हथियार नष्ट करने के लिए मनाने में ओपीसीडब्ल्यू और रूस की अहम भूमिका रही। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद अभी भी कुछ देशों में रसायनिक हथियार मौजूद हैं।

एलिस मुनरो को साहित्य का नोबेल
इससे पहले वर्ष 2013 के लिए साहित्य, चिकित्सा जगत, भौतिकी और रसायन में नोबेल पुरस्कार के विजेताओं का ऐलान किया जा चुका है।

साहित्य का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार कनाडा की लेखिका एलिस मुनरो को दिया जाएगा। 82 वर्षीय मुनरो साहित्य का नोबेल जीतने वाली 13वीं महिला हैं, जबकि किसी भी क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली वह 44वीं महिला हैं।


तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से केमिस्ट्री का नोबेल

वहीं केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार मार्टिन करप्लस, माइकल लेविट और ए. वार्शल को संयुक्त रूप से दिया जाएगा। इन तीनों वैज्ञानिकों को 'मल्टीस्केल मॉडल्स फॉर काम्पलेक्स केमिकल सिस्टम्स' के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।

चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से मिला। इनमें वैज्ञानिक जेम्स रॉथमैन, रैंडी डब्ल्यू सेकमैन और थॉमस सी सुडौफ शामिल हैं।

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