काले धन की जांच में हुआ बड़ा खुलासा, पढ़िए
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विदेश में काला धन रखने वाले खाताधारकों के बारे में एक अहम जानकारी सामने आई है। मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी ने पाया है कि अधिकतर खाताधारकों के खाते कई पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार को जिन 627 खाताधारकों के नामों की सूची प्राप्त हुई है उनमें से अधिकतर खाते उसके वर्तमान मालिक को उनके माता-पिता, उनके परिवार के सदस्यों, उनकी कंपनी या ट्रस्ट से मिले हैं।
गौरतलब है कि विदेश में काला धन रखने वालों के बारे में फ्रांस की सरकार से भारत सरकार को एक सूची मिली है, जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। भारत सरकार इस मामले में स्विट्जरलैंड की सरकार से कई समझौते कर चुकी है।
स्विट्जरलैंड ने भी उसके बैंकों में काला धन रखने वालों के बारे में जानकारी देने का भरोसा दिलाया है। माना जाता है कि स्विट्जरलैंड के बैंकों में सबसे अधिक भारतीयों के काले धन हैं।
मॉरिशस ने जांच सहयोग का भरोसा दिलाया
काला धन को सफेद बनाने का सुलभ रास्ता मुहैया कराने का आरोप झेलने वाले मॉरिशस ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह इस मामले की जांच कर रही एसआईटी को सहयोग करने के लिए तैयार है।
मॉरिशस के विदेश मंत्री अरविन बूलेल ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ अपनी मुलाकात में यह बात कही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बूलेल ने आश्वस्त किया है कि उनका देश इसे रोकने के लिए कदम उठाएगा।
गौरतलब है कि मॉरिशस के जरिए भारत में सबसे अधिक एफडीआई और एफआईआई आते रहा है, लेकिन काले धन को सफेद बनाकर इस देश के जरिए भारत में निवेश करने के आरोप लगने के बाद एफडीआई और एफआईआई में कमी आई है। इस समय विदेशी निवेश के मामले में अमेरिका सबसे ऊपर है।
सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि काले धन को वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे, लेकिन इस पर ध्यान देने की जरूरत है कैसे यह सुनिश्चित किया जाए कि काला धन पैदा न हो। इसे उत्पन्न होने से कैसे रोका जाए। मुझे आशा है पीएम मोदी के नेतृत्व में यह होगा।