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कमीशन के झगड़े में फंसीं सस्ती दवाएं, कई शहरों से गायब

Tue, 27 Aug 2013 12:02 AM IST
नई दिल्ली/झांसी/शिमला/चंडीगढ़/अमर उजाला नेटवर्क
नई दिल्ली/झांसी/शिमला/चंडीगढ़/अमर उजाला नेटवर्क Updated Tue, 27 Aug 2013 12:02 AM IST
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cheap medicines missing from many cities

जरूरी दवाओं के मूल्य कम करने के लिए केंद्र सरकार 348 दवाओं को ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के दायरे में ले आई है, लेकिन दाम कम होते ही होलसेलरों और दुकानदारों ने कंपनियों से दवाएं उठाना बंद कर दिया है।

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यूपी में कई जगह आपूर्ति प्रभावित हुई है। हिमाचल प्रदेश में सस्ती व जरूरी दवाओं की आपूर्ति लगभग बंद हो गई है। पूरा मामला अब केंद्र सरकार के पास पहुंच चुका है।
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सोमवार को इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस ने कई राज्यों में दवा विक्रेताओं द्वारा जरूरी दवाओं का स्टॉक नहीं उठाने की शिकायत ड्रग्स कमिश्नरों और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से की।
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आईपीए महासचिव डीजी शाह ने पुष्टि की है कि कमीशन से नाराज ट्रेडर्स जरूरी दवाएं नहीं खरीद रहे हैं।

पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में दवाओं की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन विक्रेताओं में गुस्सा है। झांसी, आगरा सहित वेस्ट और मध्य यूपी के कई शहरों में ऑगमेंटेन और जेंटेल नहीं मिल रही हैं।

एंटी फंगल दवा फ्लूकानाजोल-150 और एसिडिटी की दवा ओसिड-20 भी बाजार में कम ही दुकानों पर हैं।

केंद्र द्वारा 348 दवाओं को ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के दायरे में लाने के बाद बुखार, डायबिटीज और कैंसर की दवाओं की कीमत में 50 से 60 फीसदी तक की कटौती हुई है।


मसलन, फ्लूकानाजोल-150 की कीमत 33 रुपये से घटकर 15 रुपये और ओसिड-20 की कीमत 93 रुपये से घटकर 47 रुपये रह गई है।

सस्ती दवाओं की किल्लत की वजह दवा विक्रेताओं (खुदरा व होलसेल) और दवा कंपनियों के बीच कमीशन का झगड़ा है।

ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के राष्ट्रीय महासचिव सुरेश गुप्ता का कहना है कि सरकार ने दवा कंपनियों का मार्जिन 100 फीसदी से बढ़ाकर 300 फीसदी तक करने की छूट दी है, जबकि रिटेलर व होलसेलर का कमीशन घटा दिया है।

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