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क्या सीआरपीएफ की गलती से शहीद हुए 14 जवान?

Tue, 02 Dec 2014 02:16 PM IST
Updated Tue, 02 Dec 2014 02:16 PM IST
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Chattigarh naxal attack, crpf slams ib arvindji deo kumar singh maoists latehar chintagufa.

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को हुए नक्सली हमले के बाद अब खुफिया ब्यूरो (आईबी) और सीआरपीएफ के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जंग छिड़ गई है। आईबी ने सीआरपीएफ पर बड़े नक्सली नेती अरविंद जी को पकड़ने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

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सुकमा जिले के चिंतागुफा एरिया में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 14 जवानों की मौत हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सीआरपीएफ ने पिछले महीने झारखंड में चलाए गए ऑपरेशन में बड़ी लापरवाही बरती थी। उससे इंटेलिजेंस ब्यूरो बहुत ही नाराज है। इस लापरवाही की शिकायत गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी की गई है।
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इसके जवाब में सीआरपीएफ ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में इंटेलिजेंस ब्यूरो के दावे को गलत बताते हुए कहा गया है कि इस ऑपरेशन में कोई भी लापरवाही नहीं की गई है।

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बच निकले थे नक्सली

Chattigarh naxal attack, crpf slams ib arvindji deo kumar singh maoists latehar chintagufa.

आपको बता दें कि आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) ने आतंकी मुखिया अरविंद जी के झारखंड के लातेहार में होने की सूचना दी थी। सूचना के अनुसार गुमला जिले के कुमारी गांव और लातेहार जिले के गोटग गांव के बीच के जंगल में अरविंद के छुपे होने की पुष्टि हुई थी।

माना जा रहा था कि अरविंद जी 100-200 नक्सलियों के साथ ही ठहरता है, लेकिन इस बार उसके साथ करीब 50 नक्सली ही थे, जिसके चलते उसे आसानी से पकड़ा जा सकता था।

इस सूचना के बाद 12 नवंबर को सीआरपीएफ की तरफ से उसे पकड़ने के लिए एक ऑपरेशन किया गया था, जिसमें दो टीमें उसे पकड़ने गई थीं। एक टीम गुमला की तरफ से गई और दूसरी लातेहार की तरफ से, लेकिन इससे पहले कि सीआरपीएफ के जवान वहां पहुंचते, गुमला की तरफ से आ रही टीम का सामना नक्सलियों के एक समूह से हो गया। आतंकियों से हुई इस मुठभेड़ में एक जवान घायल हो गया था और आतंकी बच निकलने में कामयाब रहे थे।

कौन है अरविंद जी

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देवकुमार सिंह उर्फ अरविंद जी झारखंड में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है, जिसे इनके प्रमुखों में से एक माना जा रहा है। साथ ही वह कम्युनिस्ट पार्टी का एक केन्द्रीय समिति सदस्य भी है। अरविन्द जी के बारे में बहुत ही कम जानकारियां उपलब्ध हैं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अरविन्द जी करीब 25 साल पहले नक्सली गतिविधियों में शामिल हुआ था और काफी तेजी से अपने कामों के लिए कुख्यात हो गया।

अरविन्द जी ने सुरक्षा बलों पर भी कुछ हमले किए हैं। आपको बता दें कि दिसंबर 2011 में सांसद और झारखंड असेंबली स्पीकर इंदर सिंह नामधारी पर हमला भी इसी के इशारे पर हुआ था, जिसमें करीब 11 पुलिस अधिकारी भी मारे गए थे। इसे नक्सली मुखिया किशनजी का करीबी भी माना जाता है, जिसे सुरक्षा बलों द्वारा नवंबर 2011 में मार गिराया गया था।

उसने जनवरी 2012 में गढ़वा जिले के भंडारिया में एक बारूदी सुरंग विस्फोट भी कराया था, जिसमें भंडारिया पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज समेत 14 जवानों की मौत हो गई थी। इसके बाद अप्रैल 2012 में अरविन्द जी ही इशारे पर लातेहार जिले के बढ़वाडीह जंगल में गस्त लगा रहे जवानों पर हमाला किया गया था, जिसमें कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रिसॉल्यूट एक्शन) के एक कमांडो की मौत हो गई थी और कई सारे जवान जख्मी हो गए थे।

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